किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार अब मुर्गी पालन को एक बड़े उद्योग के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है। देसी नस्ल की मुर्गियों का संरक्षण और उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य इस योजना के केंद्र में है। इसका मकसद न केवल किसानों की आय में बढ़ोतरी करना है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा देना है।

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देसी मुर्गियों से बढ़ेगी कमाई
सरकार की इस पहल में खास बात यह है कि किसान केवल मुर्गियां बेचकर नहीं, बल्कि चूजों की बिक्री करके भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। योजना के अनुसार किसान 1000 देसी मुर्गियों और 50 मुर्गों से यूनिट की शुरुआत कर सकते हैं।
इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 50 लाख रुपये की लागत निर्धारित की गई है, जिसमें अंडों से बच्चे निकालने के लिए एक आधुनिक हैचरी मशीन लगाना अनिवार्य है। यह मशीन किसानों को अपनी नस्ल को और अधिक बढ़ाने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करेगी।
योजना का लाभ लेने की पात्रता
इस योजना का लाभ केवल उन्हीं किसानों को मिलेगा जो निम्नलिखित शर्तें पूरी करते हैं:
- किसान के पास कम से कम एक एकड़ निजी भूमि हो, या 10 साल की पंजीकृत लीज वाली जमीन उपलब्ध हो।
- भूमि पर किसी भी प्रकार का विवाद या बैंक ऋण नहीं होना चाहिए।
- यदि भूमि पर पहले से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या कोई अन्य ऋण चल रहा है, तो आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
- आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से मुर्गी पालन का प्रशिक्षण प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है।
इन शर्तों का पालन यह सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ उन्हीं किसानों तक पहुँचे जो इस कार्य को व्यवसायिक दृष्टि से आगे बढ़ाना चाहते हैं।
खर्च और सब्सिडी की व्यवस्था
सरकार ने परियोजना की वित्तीय संरचना को सरल बनाया है ताकि किसानों को अधिकतम सहायता मिल सके:
- कुल परियोजना लागत: ₹50 लाख
- किसान का स्वयं का योगदान: ₹5 लाख
- न्यूनतम बैंक ऋण: ₹20 लाख
- सब्सिडी का भुगतान: जब किसान कुल लागत का 25% खर्च कर लेगा, तब पहली किस्त जारी होगी।
- परियोजना पूर्ण और सत्यापित होने पर सब्सिडी की शेष राशि किसान के खाते में भेज दी जाएगी।
इस तरह किसान को ज्यादा बोझ लिए बिना अपना व्यवसाय प्रारंभ करने का अवसर मिलता है।
आवेदन की प्रक्रिया
जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे उद्यम मित्रा (Udyam Mitra) पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। प्रक्रिया सरल और पारदर्शी रखी गई है:
- सबसे पहले किसान को पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।
- आवेदन करने के बाद संबंधित विभाग की टीम स्थल जांच करेगी।
- जांच रिपोर्ट संतोषजनक पाए जाने पर आवेदन को बैंक भेजा जाएगा।
- बैंक अपनी शर्तों के अनुसार ऋण स्वीकृत करेगा।
इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया गया है कि केवल योग्य उम्मीदवारों को ही योजना का फायदा मिले।
ग्रामीण रोजगार की नई दिशा
यह योजना सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि ग्रामीण आमदनी का नया माध्यम है। केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि हर ग्राम स्तर पर मुर्गी पालन जैसी गतिविधियाँ बढ़ें ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम की जा सके। देसी नस्लों का संरक्षण और उनका वैज्ञानिक विस्तार इस योजना का दीर्घकालिक लाभ है, जिससे आने वाले वर्षों में मुर्गी पालन भारत के किसानों का प्रमुख व्यवसाय बन सकता है।
















