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Bigamy Law Update: दो शादी करने पर 10 साल की जेल! फ्री राशन–पानी भी होगा बंद—इस राज्य में लागू हुआ नया कानून

असम विधानसभा ने ‘प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगैमी बिल 2025’ पास कर बहुविवाह को अपराध घोषित किया। पहली शादी छिपाकर दूसरी करने पर 10 साल जेल व 1.5 लाख जुर्माना, दोषी सरकारी योजनाओं से वंचित। महिलाओं को मुआवजा व सुरक्षा मिलेगी CM सरमा बोले, ये UCC की दिशा में बड़ा कदम।​

Published On:
assam passed prohibition of polygamy bill 2025 provisions and penalty

असम विधानसभा ने गुरुवार को एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए राज्य में ‘प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगैमी बिल 2025’ (Prohibition of Polygamy Bill 2025) पारित किया है। अब एक से अधिक शादी करना असम में कानूनी अपराध माना जाएगा। इस बिल का मकसद है महिलाओं के अधिकारों को और अधिक मज़बूती देना तथा समाज में समानता और न्याय की भावना स्थापित करना।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बयान

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे असम के “सबसे बड़े कानूनी सुधारों में से एक” बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून किसी धर्म के खिलाफ नहीं है बल्कि यह महिलाओं की गरिमा और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने का कदम है। सरमा ने यह भी कहा कि असम ने अब उन राज्यों की कतार में जगह बना ली है, जो यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

बिल का दायरा: किन पर लागू होगा कानून

‘प्रोहिबिशन ऑफ पॉलिगैमी बिल 2025’ का उद्देश्य राज्य में बहुविवाह की प्रथा को समाप्त करना है। यह कानून असम के सभी नागरिकों पर लागू होगा — चाहे वे हिंदू हों, मुस्लिम, ईसाई या किसी अन्य समुदाय से हों। हालांकि, छठी अनुसूची में आने वाले क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से छूट दी गई है।

क्या है “बहुविवाह” की परिभाषा?

बिल में “बहुविवाह” को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त किए बिना दूसरी शादी करता है या अपनी पत्नी/पति के जीवित रहते दोबारा विवाह करता है, तो यह बहुविवाह माना जाएगा। ऐसे मामलों में व्यक्ति को “marital fraud” का दोषी माना जाएगा।

सजा और जुर्माने का प्रावधान

अगर कोई व्यक्ति इस कानून का उल्लंघन करता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। वहीं, यदि वह अपनी पहली शादी को छिपाकर दोबारा शादी करता है, तो सजा बढ़कर 10 साल तक की हो सकती है और 1.5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
बार-बार अपराध दोहराने पर सजा दोगुनी की जा सकेगी।

सहयोगियों पर भी कार्रवाई

बिल के अनुसार, कोई भी व्यक्ति—चाहे वह ग्राम प्रधान, काजी, माता-पिता या कानूनी अभिभावक ही क्यों न हो—अगर जानबूझकर बहुविवाह को बढ़ावा देता है या तथ्यों को छिपाता है, तो उसे 2 साल तक की कैद और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। इससे यह साफ है कि सरकार केवल शादी करने वाले व्यक्ति पर नहीं, बल्कि अपराध में सहयोग करने वालों पर भी सख्त होगी।

सरकारी सुविधाओं से वंचित होंगे दोषी

नया कानून केवल सजा तक सीमित नहीं है। जो व्यक्ति बहुविवाह का दोषी पाया जाएगा, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। साथ ही, ऐसे व्यक्ति को किसी भी सरकारी योजना या लाभ का फायदा नहीं मिलेगा। उन्हें पंचायत या किसी भी स्थानीय निकाय के चुनाव में उम्मीदवार बनने की अनुमति भी नहीं दी जाएगी।

महिलाओं के लिए सुरक्षा और मुआवजे का प्रावधान

राज्य सरकार ने इस बिल में महिलाओं की सुरक्षा और आर्थिक सहायता को खास प्राथमिकता दी है। पीड़ित महिलाओं को सरकार की ओर से मुआवजा, कानूनी संरक्षण और सामाजिक सहायता दी जाएगी। इससे उन महिलाओं को राहत मिलेगी, जो दूसरी शादी के कारण आर्थिक और मानसिक उत्पीड़न झेलती थीं।

असम का कदम, बदलते भारत की दिशा

असम सरकार का यह कदम केवल एक राज्यीय कानून नहीं, बल्कि पूरे देश में महिलाओं के अधिकारों को लेकर संवेदनशीलता का संकेत है। जैसे उत्तराखंड में UCC की दिशा में कदम बढ़ाया गया था, वैसा ही परिवर्तन अब असम ने शुरू किया है। यह बदलाव न केवल कानून का सुधार है, बल्कि समाज में एकरूपता और न्याय की नई परिभाषा भी गढ़ता है।

Author
Divya

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