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UP Property: रजिस्ट्री पोर्टल से गायब हुए 2017 से पहले के रिकॉर्ड, इस जिले में खरीदारों पर टूटा संकट

कानपुर रजिस्ट्री पोर्टल से 2017 पूर्व रिकॉर्ड गायब! सर्वर माइग्रेशन में डेटा उड़ गया, खरीदार परेशान। बैंक लोन अटके, स्वामित्व चेक नामुमकिन। मैनुअल फाइलें भी बिखरीं। उप-पंजीयक ऑफिस जाओ, नाम-नंबर लेकर आवेदन करो। सरकार डिजिटाइजेशन तेज करेगी, तब तक धैर्य रखो।

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records before 2017 missing from registry portal causing trouble for home and land buyers in kanpur

उत्तर प्रदेश के कानपुर में संपत्ति खरीदने वालों के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। रजिस्ट्री विभाग के ऑनलाइन पोर्टल से 2017 से पहले के सारे रिकॉर्ड गुम हो गए हैं। सर्वर को अपडेट करने के चक्कर में ये डेटा कहीं उड़ गया, अब न तो ऑनलाइन कुछ दिखता है और न ही मैनुअल फाइलें आसानी से मिल रही हैं। लाखों लोग परेशान हैं, बैंक लोन रुक गए हैं। ये हालत देखकर लगता है जैसे डिजिटलीकरण का सपना ही उल्टा पड़ गया।

सर्वर माइग्रेशन ने बढ़ाई मुसीबत

कुछ हफ्ते पहले रजिस्ट्री विभाग ने अपना पुराना सर्वर नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड (NGC) पर शिफ्ट किया। 8 से 11 नवंबर तक तो सर्विस ही बंद रही। लेकिन अपडेट के बाद 2017 से पुराने रिकॉर्ड पोर्टल से गायब। अधिकारी कहते हैं डेटा शिफ्टिंग चल रही है, जल्द ठीक हो जाएगा। लेकिन तब तक खरीदार चक्कर लगा रहे हैं, क्योंकि बिना पुराने हिस्ट्री के संपत्ति की सच्चाई कौन जांचे?

खरीदारों को हो रही ये परेशानियां

सबसे बड़ा झमेला तो स्वामित्व चेक करने का है। कोई सोचता है कि ये प्लॉट कितनी बार बदला मालिक, लेकिन पोर्टल खाली। बैंक वाले लोन देने से कतराने लगे, क्योंकि पुराने दस्तावेज सत्यापित नहीं हो पा रहे। विक्रेता भी फंस गए, रजिस्ट्री रुक रही है। ऊपर से उप-पंजीयक दफ्तर में मैनुअल रजिस्टर ढूंढो तो निर्माणाधीन इमारतों में फाइलें बिखरी पड़ी हैं। छोटा-मोटा सौदा भी अब महीनों का इंतजार बन गया।

बैंक लोन और रजिस्ट्री पर क्या असर?

बैंकों को पुराने रिकॉर्ड चाहिए ही, वरना रिस्क ज्यादा लगता है। अब लोन आवेदन अटक रहे हैं, खरीदारों का पैसा फंस रहा। एक तरफ घर लेने का सपना टूट रहा, दूसरी तरफ ब्याज चुकाने का बोझ। वकील भी हाथ पर हाथ धरे हैं, क्योंकि जांच बिना रिकॉर्ड के नामुमकिन। ये समस्या सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं लगती, बल्कि पूरे यूपी में डिजिटल रजिस्ट्री की कमजोरी उजागर कर रही है।

अभी क्या करें प्रभावित लोग?

फिलहाल उप-पंजीयक कार्यालय जाने के सिवा चारा नहीं। खरीदार-विक्रेता के नाम, प्लॉट नंबर, खाता डिटेल लेकर आवेदन करें। पुरानी कॉपी मिलने में समय लगेगा, लेकिन धैर्य रखें। सरकार पुराने राजस्व रिकॉर्ड डिजिटाइज करने की कोशिश कर रही है, 1990 तक के डेटा को ऑनलाइन लाने का प्लान है। तब तक आधिकारिक चैनल से ही काम चलाएं, वरना फर्जीवाड़े का खतरा बढ़ेगा।

भविष्य में ऐसी गड़बड़ी से कैसे बचें?

ये घटना सबक है कि तकनीक अपनाते वक्त बैकअप और टेस्टिंग जरूरी। विभाग को चाहिए कि माइग्रेशन से पहले डेटा सेफ रखें। सरकार की डिजिटल इंडिया मुहिम अच्छी है, लेकिन ग्राउंड लेवल पर अमल ठीक होना चाहिए। खरीदार सलाह लें- रजिस्ट्री से पहले वकील से चेक करवाएं, मैनुअल रिकॉर्ड की कॉपी रखें। उम्मीद है जल्द पुराने रिकॉर्ड वापस आएंगे, वरना संपत्ति बाजार ठप हो जाएगा।

Author
Divya

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