
सड़क चौड़ीकरण और ट्रैफिक प्रबंधन के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन नियमों के तहत राष्ट्रीय तथा राज्य राजमार्गों से कम से कम 75 फीट की दूरी पर ही निर्माण किया जा सकता है। मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड पर यह दूरी 60 फीट और साधारण डिस्ट्रिक्ट रोड पर 50 फीट रखी गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण अधिनियम की धारा 42 के अनुसार, हाइवे की मध्य रेखा से 40 मीटर तक किसी भी प्रकार का निर्माण पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
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सड़क चौड़ीकरण में टूट सकते हैं मकान
शहरों और ट्रैफिक की बढ़ती संख्या के कारण सरकार को हाइवे का चौड़ीकरण करना पड़ता है, जिसमें अक्सर सड़क के बिलकुल किनारे बने मकान या दुकानें तोड़ी जाती हैं। भले ही मुआवजे का प्रावधान हो, लेकिन किसी के अपने घर या दुकान के टूटने का दर्द कोई भी सहन नहीं करना चाहता। इसलिए हाइवे से दूरी बनाकर ही मकान या दुकान बनाना समझदारी होती है।
हर राज्य के अलग नियम
हाइवे के किनारे निर्माण के नियम हर राज्य में अलग-अलग होते हैं। ये नियम नगर निगम, नगरपालिका, या संबंधित स्थानीय निकाय बनाते हैं। कभी-कभी राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) भी विशेष दिशा-निर्देश जारी करते हैं। इसलिए हाइवे के पास निर्माण करने से पहले स्थानीय निकाय से नियमों की पूरी जानकारी लेना जरूरी होता है।
NOC लेना अनिवार्य
हाइवे के पास मकान या दुकान बनाने के लिए पहले संबंधित विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना अनिवार्य होता है। बिना NOC के निर्माण किया गया तो गैरकानूनी माना जाता है और प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। साथ ही 40 से 75 मीटर के दायरे में निर्माण के लिए भी NHAI से अनुमति जरूरी होती है।
40 मीटर सीमा के भीतर निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित
राष्ट्रीय राजमार्ग नियंत्रण अधिनियम की धारा 42 के मुताबिक, हाइवे की मध्य रेखा से 40 मीटर तक किसी भी कारण से कोई भी निर्माण करने की अनुमति नहीं है। यह सीमा सड़क सुरक्षा और भविष्य में सड़क चौड़ीकरण की योजना को ध्यान में रखकर बनाई गई है। 40 से 75 मीटर के बीच जरूरी निर्माण भी NHAI की स्पष्ट अनुमति के बाद ही किया जा सकता है।
यह नियम इसलिए बनाए गए हैं ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके, सड़क का प्रसार बिना किसी रुकावट के हो सके और ट्रैफिक के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित किया जा सके। हाइवे के किनारे संपत्ति खरीदने या निर्माण का विचार रखने वाले लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे स्थानीय नियम और कागजी मंजूरी के बिना निर्माण न करें, नहीं तो उन्हें भवन टूटने या जुर्माना जैसी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
















