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बैंकों का देशभर में बड़ा बदलाव! ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी तरह बदला, कस्टमर को क्या करना होगा अब?

देश में बढ़ते ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (online financial fraud) और "म्यूल खातों" (Mule Accounts) के दुरुपयोग के मामलों को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए ग्राहक सत्यापन (KYC verification) प्रक्रियाओं को सख्त कर दिया है, इस बड़े बदलाव के तहत, बैंकों ने अपनी डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा की है और एक बार फिर 'भौतिक सत्यापन' (physical verification) को अनिवार्य कर दिया है

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बैंकों का देशभर में बड़ा बदलाव! ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी तरह बदला, कस्टमर को क्या करना होगा अब?
बैंकों का देशभर में बड़ा बदलाव! ऑनलाइन फ्रॉड रोकने के लिए वेरिफिकेशन प्रोसेस पूरी तरह बदला, कस्टमर को क्या करना होगा अब?

 देश में बढ़ते ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी (online financial fraud) और “म्यूल खातों” (Mule Accounts) के दुरुपयोग के मामलों को देखते हुए, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए ग्राहक सत्यापन (KYC verification) प्रक्रियाओं को सख्त कर दिया है, इस बड़े बदलाव के तहत, बैंकों ने अपनी डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रियाओं की समीक्षा की है और एक बार फिर ‘भौतिक सत्यापन’ (physical verification) को अनिवार्य कर दिया है।

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क्या है बैंकों का नया और सख्त रुख?

आरबीआई के दिशानिर्देशों के बाद, बैंकों ने डिजिटल दुनिया में सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई तत्काल कदम उठाए हैं:

  •  कई प्रमुख बैंकों ने पूरी तरह से डिजिटल या तत्काल खाता खोलने (instant account opening) की सुविधाओं को सीमित कर दिया है। अब, नए खाते खोलते समय या कुछ उच्च-जोखिम वाले लेनदेन के लिए, ग्राहक को व्यक्तिगत रूप से बैंक शाखा में उपस्थित होना होगा या बैंक प्रतिनिधि द्वारा घर/कार्यालय पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
  • इस सख्ती का मुख्य उद्देश्य उन खातों को रोकना है जिनका उपयोग अपराधी धोखे से प्राप्त धन को छिपाने या स्थानांतरित करने के लिए करते हैं। पहचान की चोरी (identity theft) के मामलों में भारी वृद्धि देखी गई थी, जिस पर अंकुश लगाना आवश्यक था।

सुरक्षित डोमेन में माइग्रेशन

  • साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, आरबीआई ने सभी विनियमित संस्थाओं को अपनी आधिकारिक वेबसाइटों को एक सुरक्षित .bank.in डोमेन पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है। यह कदम ग्राहकों को फ़िशिंग हमलों से बचाने में मदद करेगा, जिससे वे आसानी से बैंक की वास्तविक वेबसाइट और नकली वेबसाइट के बीच अंतर कर सकेंगे।

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ग्राहकों को अब क्या करना होगा?

इस नए परिदृश्य में, ग्राहकों के लिए कुछ प्रक्रियात्मक बदलाव आए हैं, जिनका पालन करना आवश्यक है:

  •  यदि आप नया बैंक खाता खोलने की योजना बना रहे हैं, तो आपको दस्तावेज़ों के भौतिक सत्यापन के लिए बैंक शाखा जाने या बैंक अधिकारी को अपने पते पर आने की अनुमति देने के लिए तैयार रहना चाहिए।
  • बैंक अभी भी वीडियो-आधारित ग्राहक पहचान प्रक्रिया (V-CIP) का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन अब यह अधिक निगरानी और सख्त प्रोटोकॉल के तहत की जा रही है।

केवल .bank.in डोमेन पर भरोसा करें

  • ऑनलाइन बैंकिंग करते समय, हमेशा सुनिश्चित करें कि आप अपने बैंक की सही और सुरक्षित वेबसाइट पर हैं, जिसका पता .bank.in पर समाप्त होता हो।
  •  किसी भी संदिग्ध कॉल, एसएमएस या ईमेल से सतर्क रहें। यदि आप किसी धोखाधड़ी का शिकार होते हैं, तो तत्काल अपने बैंक को सूचित करें और सरकारी राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

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बैंकों का यह कदम डिजिटल बैंकिंग इकोसिस्टम में ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

Banks Change Verification Rules
Author
Divya

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