
उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्यभर की हजारों आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को बड़ी राहत दी है। अब प्रदेश में रिटायर होने वाली आंगनवाड़ी वर्कर्स को सरकार की ओर से 1 लाख रुपये की एकमुश्त राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस फैसले से राज्य की लगभग 40 हजार से अधिक आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को सीधा लाभ मिलने जा रहा है।
इस घोषणा को महिला एवं बाल विकास विभाग ने आधिकारिक रूप से मंजूरी दे दी है। यह आदेश 2026 से लागू होगा, यानी 1 अप्रैल 2026 से रिटायर होने वाली सभी कार्यकत्रियों को यह सुविधा दी जाएगी। अब तक जहां रिटायरमेंट पर 35 से 40 हजार रुपये मिलते थे, वहीं अब यह रकम बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी गई है।
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महिलाओं के उत्थान की दिशा में बड़ा कदम
महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने इस फैसले को महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी लगातार प्रदेश की महिलाओं के आर्थिक विकास के लिए ठोस पहल कर रहे हैं। “आंगनवाड़ी वर्कर्स गांव-गांव तक सरकार की योजनाएँ पहुँचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। इसलिए उनके योगदान का सम्मान करना हमारी जिम्मेदारी है,” उन्होंने कहा।
रेखा आर्य ने बताया कि इस निर्णय से विभाग के लगभग सभी जिलों की कार्यकत्रियां लाभान्वित होंगी। जिन महिलाओं ने वर्षों तक बच्चों और माताओं की देखभाल में अपनी सेवा दी, उन्हें अब रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा का सहारा मिलेगा।
2026 से लागू होगा नया नियम
नई नीति के तहत राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह लाभ अगले वित्त वर्ष से लागू होगा। यानी 1 अप्रैल 2026 के बाद से रिटायर होने वाली प्रत्येक आंगनवाड़ी कार्यकत्री को 1 लाख रुपये की धनराशि देय होगी। विभाग ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों और महिला एवं बाल विकास अधिकारियों को दिशा-निर्देश भेज दिए हैं ताकि प्रशासनिक प्रक्रिया पहले से तैयार रहे।
इसके अलावा यह भी तय किया गया है कि रकम सीधे बैंक खाते में direct benefit transfer (DBT) के माध्यम से दी जाएगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी तरह की देरी या गड़बड़ी न हो।
मानदेय बढ़ाने की तैयारी भी तेज
धामी सरकार यहीं नहीं रुकने वाली है। महिला एवं बाल विकास विभाग ने अब आंगनवाड़ी वर्कर्स और सहायिकाओं के मानदेय (honorarium) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों के मानदेय में लगभग 1600 रुपये तक की वृद्धि की जा सकती है।
विभाग ने यह प्रस्ताव अंतिम रूप देकर सरकार के समक्ष भेजने की तैयारी कर ली है। उम्मीद है कि अगले कुछ हफ्तों में इस पर भी मुहर लग सकती है। अगर ऐसा होता है, तो आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को दोहरी खुशी मिलेगी, एक तरफ रिटायरमेंट बेनिफिट और दूसरी ओर सैलरी में बढ़ोतरी।
कई सालों से लंबित थी मांग
आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों की यह मांग लम्बे समय से चली आ रही थी। कई बार उन्होंने प्रदर्शन और ज्ञापन देकर अपना पक्ष सरकार के सामने रखा था। राज्य भर के तमाम संगठन लंबे समय से रिटायरमेंट बेनिफिट बढ़ाने की गुहार लगा रहे थे। अंततः सरकार ने उनकी पीड़ा को समझते हुए इस मांग को स्वीकार कर लिया है।
रिटायरमेंट राशि में बढ़ोतरी से कार्यकत्रियों के मनोबल में भी इजाफा होगा। इससे यह संदेश जाएगा कि सरकार उनके योगदान को मान्यता दे रही है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम की सराहना की है और इसे ‘pro-women reform’ करार दिया है।
सरकार का फोकस
उत्तराखंड सरकार ने बीते कुछ वर्षों में महिला रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में कई नई योजनाएँ लागू की हैं। मुख्यमंत्री मातृशक्ति योजना, स्वयं सहायत समूह सशक्तिकरण योजना और अब यह आंगनवाड़ी रिटायरमेंट बेनिफिट व्यवस्था, इन सबका मकसद राज्य की महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाना है।
फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि राज्य की हर महिला को आत्मनिर्भर बनाया जाए और उनके जीवन स्तर में ठोस सुधार लाया जा सके। रेखा आर्य ने कहा, “यह तो बस शुरुआत है, आने वाले समय में महिलाओं के लिए और भी कई खुशखबरी योजनाएँ आने वाली हैं।”
















