
बिहार में सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS (Economically Weaker Section) के हितों को लेकर गठित राज्य आयोग ने सरकार के समक्ष एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। रिपोर्ट में शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार (Self Employment) के अवसरों को बढ़ाने के लिए कई ठोस और दूरगामी सुझाव दिए गए हैं। आयोग का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में EWS सवर्ण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) और सरकारी नौकरियों में उम्र सीमा समेत कई स्तरों पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें दूर करना आवश्यक है।
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EWS सवर्ण आयोग की रिपोर्ट: क्या है मकसद?
सवर्ण समाज के आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए गठित राज्य आयोग का उद्देश्य सामाजिक न्याय के दायरे में रहते हुए समान अवसर उपलब्ध कराना है। आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह के अनुसार, EWS सवर्ण युवाओं की बड़ी संख्या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती है, लेकिन संसाधनों की कमी, उम्र सीमा और प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव के कारण वे पीछे रह जाते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आयोग ने सरकार को कई सिफारिशें भेजी हैं।
सरकारी नौकरियों में Age Limit बढ़ाने का प्रस्ताव
आयोग की सबसे अहम सिफारिश सरकारी नौकरियों में EWS पुरुष उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा (Age Limit) से जुड़ी है। वर्तमान में EWS पुरुषों के लिए अधिकतम आयु सीमा 37 वर्ष निर्धारित है, जबकि EWS महिलाओं को पहले से ही 40 वर्ष तक की छूट दी जाती है।
आयोग ने सुझाव दिया है कि EWS पुरुष अभ्यर्थियों के लिए भी अधिकतम आयु सीमा को 37 वर्ष से बढ़ाकर 40 वर्ष किया जाए। आयोग का तर्क है कि अन्य आरक्षित वर्गों (Reserved Categories) को आयु सीमा में अतिरिक्त छूट मिलती है, लेकिन EWS पुरुष इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में समानता (Parity) के सिद्धांत के तहत पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए एक समान आयु सीमा लागू की जानी चाहिए।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ‘Hostel Model’ की पेशकश
EWS सवर्ण छात्रों के लिए आयोग ने एक विशेष ‘हॉस्टल मॉडल’ (Hostel Model) का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत राज्य के प्रत्येक जिले में 100-100 बेड वाले छात्रावास (Hostels) बनाए जाने की सिफारिश की गई है।
इन छात्रावासों में उन छात्रों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) पास कर ली हो। यहां उन्हें मुख्य परीक्षा (Mains) की तैयारी के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन, कोचिंग और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।
असफल छात्रों के लिए भी मौका और Skill Development
आयोग की सिफारिशों की खास बात यह है कि यदि कोई छात्र मुख्य परीक्षा में सफल नहीं हो पाता है, तो उसे छात्रावास में दो साल तक रहने की अनुमति दी जाएगी। इस अवधि में छात्र Skill Development यानी कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण ले सकेंगे, ताकि वे वैकल्पिक करियर या स्वरोजगार की ओर बढ़ सकें। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की असफलता को जीवन की असफलता बनने से रोका जा सकेगा।
High Caste Finance Corporation का गठन
बेरोजगारी की समस्या से निपटने और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने एक अलग ‘उच्च जाति वित्त निगम’ (High Caste Finance Corporation) के गठन का प्रस्ताव रखा है। इस निगम के माध्यम से EWS सवर्ण समाज के युवाओं को आसान किस्तों (Easy Installments) पर ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
निगम का काम केवल लोन देना ही नहीं होगा, बल्कि युवाओं के बिजनेस आइडिया का मूल्यांकन करना और उनकी योग्यता के आधार पर आर्थिक सहायता देना भी होगा। इससे छोटे व्यापार, स्टार्टअप और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं, ठीक वैसे ही जैसे आज कई सेक्टर में Startup और MSME मॉडल काम कर रहे हैं।
शिक्षा और रोजगार में समान अवसर की मांग
आयोग का मानना है कि EWS सवर्ण समाज के छात्र और युवा भी उसी तरह के अवसरों के हकदार हैं, जैसे अन्य वर्गों को मिलते हैं। चाहे वह Age Relaxation हो, Competitive Exams की तैयारी हो या फिर रोजगार और स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता—हर स्तर पर संतुलन जरूरी है।
अब फैसला सरकार के हाथ में
आयोग के अध्यक्ष महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट किया है कि ये सभी सिफारिशें सर्वसम्मति से पारित कर राज्य सरकार को भेज दी गई हैं। अब इन प्रस्तावों को लागू करना या न करना पूरी तरह से सरकार के निर्णय पर निर्भर करता है। यदि सरकार इन सिफारिशों को मंजूरी देती है, तो बिहार में EWS सवर्ण समाज के गरीब तबके के लिए शिक्षा और करियर के नए रास्ते खुल सकते हैं।
















