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Currency Note Update: क्या नोटों से गायब हो जाएगी महात्मा गांधी की तस्वीर? राज्यसभा सांसद के दावे ने मचाई हलचल, जानें अब किसकी छपेगी फोटो

राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास के दावे ने बढ़ाई हलचल, RBI के पुराने इनकार के बावजूद उठे नए सवाल। क्या भारतीय करेंसी पर दिखेगा नया चेहरा? पूरी कहानी पढ़ें।

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Currency Note Update: क्या नोटों से गायब हो जाएगी महात्मा गांधी की तस्वीर? राज्यसभा सांसद के दावे ने मचाई हलचल, जानें अब किसकी छपेगी फोटो
Currency Note Update: क्या नोटों से गायब हो जाएगी महात्मा गांधी की तस्वीर? राज्यसभा सांसद के दावे ने मचाई हलचल, जानें अब किसकी छपेगी फोटो

महात्मा गांधी की तस्वीर को लेकर भारतीय करेंसी नोट (Indian Currency Notes) पर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने दावा किया है कि केंद्र सरकार भारतीय मुद्रा से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने की दिशा में तैयारी कर रही है। यह आरोप ऐसे समय आया है जब पहले से ही मनरेगा-MGNREGA के नाम में बदलाव को लेकर विपक्ष सरकार पर गांधी जी की विरासत को कमजोर करने का आरोप लगा रहा है।

जॉन ब्रिटास का कहना है कि यह केवल अफवाह नहीं, बल्कि “उच्च स्तर पर हुई शुरुआती चर्चाओं” का नतीजा है। हालांकि, इससे पहले रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया-RBI इस तरह की अटकलों को सिरे से खारिज कर चुका है।

“यह सिर्फ अटकलें नहीं हैं” जॉन ब्रिटास का दावा

मीडिया से बातचीत में जॉन ब्रिटास ने कहा कि भले ही सरकार और RBI सार्वजनिक रूप से इनकार कर रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि शुरुआती प्लानिंग पहले ही हो चुकी है।

उन्होंने कहा,

“हमारी करेंसी से गांधी को हटाना देश के प्रतीकों को फिर से लिखने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। आधिकारिक इनकार के बावजूद, इस पर उच्च स्तर पर पहले ही चर्चा हो चुकी है।”

ब्रिटास का आरोप है कि सरकार भारतीय मुद्रा पर ऐसे प्रतीकों को लाने पर विचार कर रही है, जो “भारत की विरासत” को दर्शाएं, लेकिन इसके पीछे असली मंशा गांधी जी की केंद्रीय भूमिका को धीरे-धीरे खत्म करना है।

RBI का स्पष्ट रुख: “कोई प्रस्ताव नहीं”

इस पूरे विवाद के बीच यह याद दिलाना जरूरी है कि 2022 में RBI ने साफ तौर पर कहा था कि भारतीय करेंसी नोटों से महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

तब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि सरकार और वित्त मंत्रालय कुछ नोटों पर रवींद्रनाथ टैगोर और एपीजे अब्दुल कलाम जैसी हस्तियों की तस्वीर लगाने पर विचार कर रहे हैं।

RBI ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया था कि:

  • महात्मा गांधी की तस्वीर को बदलने का कोई विचार नहीं है
  • यह सिर्फ अटकलें हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं

इसके बावजूद, जॉन ब्रिटास का कहना है कि “आधिकारिक बयान और अंदरूनी चर्चाओं में फर्क होता है।”

1996 से नोटों पर स्थायी पहचान बने गांधी

महात्मा गांधी की तस्वीर 1996 में लॉन्च हुई ‘महात्मा गांधी सीरीज’ (Mahatma Gandhi Series) के साथ भारतीय बैंकनोट्स पर स्थायी रूप से शामिल की गई थी। इसके बाद से ₹10 से लेकर ₹2000 तक सभी नोटों पर गांधी जी की तस्वीर भारतीय मुद्रा की पहचान बन गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि गांधी की तस्वीर केवल एक चेहरा नहीं, बल्कि:

  • अहिंसा (Non-Violence)
  • सत्य (Truth)
  • लोकतांत्रिक मूल्यों (Democratic Values)

का प्रतीक है, जिसे वैश्विक स्तर पर भारत से जोड़ा जाता है।

मनरेगा विवाद से जुड़ता नया आरोप

यह मुद्दा ऐसे समय सामने आया है जब सरकार द्वारा मनरेगा-MGNREGA से “महात्मा गांधी” नाम हटाकर उसे ग्रामीण रोजगार और आजीविका मिशन (VB-G RAM G Bill) से जोड़ने को लेकर विपक्ष पहले ही नाराज है।

विपक्षी दलों का आरोप है कि:

  • सरकार योजनाओं और संस्थानों से गांधी जी का नाम हटाने की रणनीति अपना रही है
  • यह केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि वैचारिक बदलाव है

जॉन ब्रिटास ने कहा कि करेंसी नोटों से गांधी की तस्वीर हटाने की कथित तैयारी इसी बड़े एजेंडे का हिस्सा है।

प्रियंका गांधी की टी पार्टी पर भी हमला

इसी मुद्दे से जुड़ते हुए जॉन ब्रिटास ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित टी पार्टी में कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की मौजूदगी पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि:

  • गरीबों को प्रभावित करने वाले रोजगार गारंटी विधेयक के पारित होने के बाद
  • प्रधानमंत्री के स्वागत समारोह में शामिल होना
  • लोकतंत्र के मूल्यों पर “एक धब्बा” है

ब्रिटास ने यह भी सवाल किया कि प्रियंका गांधी, जो कांग्रेस संसदीय दल में कोई आधिकारिक पद (जैसे नेता या मुख्य सचेतक) नहीं रखतीं, आखिर इस कार्यक्रम में क्यों शामिल हुईं।

विपक्ष की एकता पर सवाल?

ब्रिटास ने तंज कसते हुए कहा कि अगर भविष्य में महात्मा गांधी की तस्वीर सच में नोटों से हटा दी जाती है, तब भी कुछ विपक्षी नेता ऐसे समारोहों में शामिल होते रहेंगे।

उनके मुताबिक:

  • सरकार के प्रति नरम रुख
  • विपक्ष की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाता है
  • और जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाता है
Currency Note Update
Author
Divya

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