
बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री करने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी है, राज्य सरकार ने जमीन रजिस्ट्री की प्रक्रिया को अब पहले से कहीं अधिक सरल और पारदर्शी बना दिया है, वर्ष 2025 में लागू हुए इन नए नियमों से न केवल आम जनता को राहत मिली है, बल्कि जमीन विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
यह भी देखें: प्रीपेड मीटर लगवाते ही खाली होगी जेब? अब हर महीने बिल में कटेगा मीटर का पैसा, जानें सरकार का ये नया ‘वसूल’ नियम
Table of Contents
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से मिली बड़ी राहत
बिहार में पिछले काफी समय से विक्रेता के नाम पर जमाबंदी अनिवार्य होने के नियम को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी, हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि यदि जमीन विक्रेता के पूर्वजों (दादा-परदादा) के नाम पर है और विक्रेता के नाम पर जमाबंदी नहीं भी है, तो भी रजिस्ट्री नहीं रोकी जाएगी,अब मात्र जमाबंदी रसीद के आधार पर रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
रजिस्ट्री में तकनीक का दखल: अब फर्जीवाड़ा होगा नामुमकिन
खरीदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रजिस्ट्री विभाग ने तकनीकी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। वर्ष 2025 के नए अपडेट के अनुसार:
- अब खरीदार, विक्रेता और गवाहों का आधार कार्ड के जरिए बायोमेट्रिक सत्यापन (फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैन) अनिवार्य कर दिया गया है। इससे ‘डमी’ विक्रेताओं के जरिए होने वाली धोखाधड़ी खत्म होगी।
- काले धन पर लगाम लगाने के लिए अब रजिस्ट्री शुल्क और लेनदेन के लिए ऑनलाइन डिजिटल भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है।
- वित्तीय पारदर्शिता के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए पैन कार्ड जमा करना अब जरुरी है।
खरीदारों के लिए क्या बदला?
नए नियमों के तहत अब खरीदारों को रजिस्ट्री के बाद लंबे समय तक इंतजार नहीं करना होगा।
- रजिस्ट्री संपन्न होते ही अब खरीदार बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से अपनी डीड की डिजिटल कॉपी तुरंत प्राप्त कर सकते हैं।
- नए नियमों के मुताबिक, रजिस्ट्री के बाद 90 दिनों के भीतर दाखिल-खारिज (Mutation) के लिए आवेदन करना अनिवार्य है, ताकि भविष्य में मालिकाना हक को लेकर कोई कानूनी अड़चन न आए।
ऑनलाइन सेवाओं का लाभ
सरकार ने जमीन के रिकॉर्ड को दुरुस्त करने के लिए परिमार्जन पोर्टल की सुविधा भी दी है, यदि किसी की जमाबंदी में कोई त्रुटि है, तो वे घर बैठे इसके सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं।
बिहार सरकार का यह कदम जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को बिचौलियों से मुक्त करने और आम नागरिकों के लिए “ईज ऑफ लिविंग” (Ease of Living) को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
















