
पूर्वी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के बीच निर्बाध और तेज़ कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एक महत्वकांक्षी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना पर काम कर रहा है, लगभग 747 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे यूपी के 22 जिलों से होकर गुजरेगा और राज्य का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनने की उम्मीद है, इस परियोजना से न केवल यात्रा का समय (जो वर्तमान में लगभग 12 घंटे है, घटकर 6 घंटे हो जाएगा) बचेगा, बल्कि संबंधित जिलों में औद्योगिक विकास, रोजगार और व्यापार के नए द्वार भी खुलेंगे।
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परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- लंबाई: लगभग 747-750 किलोमीटर
- लेन की संख्या: 4 से 6 लेन, जिसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा
- स्थिति: एलाइनमेंट सर्वे (मार्ग निर्धारण) का काम पूरा हो चुका है और कई जिलों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है
- उद्देश्य: पूर्वी यूपी को हरियाणा के औद्योगिक हब और दिल्ली-एनसीआर से सीधे जोड़ना, व्यापार संबंधों को मज़बूत करना और आर्थिक विकास को गति देना
संभावित रूट और मैप (प्रमुख जिले)
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर अवध और पश्चिम यूपी के जिलों से होकर गुजरेगा।
मार्ग में आने वाले प्रमुख जिले
- पूर्वी यूपी: गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच
- मध्य और पश्चिम यूपी: लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बदायूँ, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, शामली
- हरियाणा: पानीपत (गंतव्य)
गोरखपुर मंडल में विशिष्ट मार्ग
गोरखपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर और कुशीनगर जिलों के कुल 133 गांवों में भूमि अधिग्रहण किया जाएगा, यह एक्सप्रेसवे सिद्धार्थनगर के बांसी से प्रवेश करेगा और संतकबीरनगर के मेंहदावल, गोरखपुर के सदर व कैंपियरगंज होते हुए कुशीनगर के हाटा तक जाएगा।
विकास और भविष्य की संभावनाएं
इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत आने वाले जिलों के लिए विशेष रुप से फायदेमंद माना जा रहा है, यह कपड़ा, लकड़ी, फर्नीचर और कृषि-आधारित उद्योगों को कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन में मदद करेगा, अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य 2026 में शुरु होने और अगले ढाई साल में पूरा होने की संभावना है।
















