
भारत के शहरी बुनियादी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है, ओडिशा का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल पुरी (Puri) देश का पहला ऐसा शहर बन गया है, जहाँ के निवासियों और पर्यटकों को अब पीने के पानी के लिए बोतलों या घरेलू आरओ (RO) सिस्टम पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, ओडिशा सरकार की महत्वाकांक्षी ‘सुजल’ योजना के तहत पुरी में अब हर घर के नल से सीधे ‘मिनरल वॉटर’ जैसी गुणवत्ता वाला पानी मिल रहा है।
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वैश्विक शहरों की सूची में शामिल हुआ पुरी
इस उपलब्धि के साथ ही पुरी अब लंदन, न्यूयॉर्क और सिंगापुर जैसे दुनिया के उन चुनिंदा शहरों की फेहरिस्त में शामिल हो गया है, जहाँ नल का पानी सीधे पीने योग्य होता है, ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ (Drink from Tap) मिशन के सफल कार्यान्वयन के बाद, यहाँ का पानी भारतीय मानक ब्यूरो (IS 10500) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के उच्चतम गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है।
बंद हो गईं बोतलबंद पानी की दुकानें
शहर में 24 घंटे उच्च गुणवत्ता वाले पेयजल की उपलब्धता ने बोतलबंद पानी की बिक्री को लगभग खत्म कर दिया है। जानकारों के मुताबिक, इस कदम से न केवल आम जनता के पैसे बच रहे हैं, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।
मुख्य प्रभाव
- प्लास्टिक मुक्त शहर की ओर कदम: अनुमान है कि इस मिशन के कारण पुरी में सालाना लगभग 400 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरे में कमी आएगी।
- मध्यम वर्ग को राहत: घरों में महंगे वाटर प्यूरीफायर और बिजली की खपत से लोगों को छुटकारा मिल गया है।
- तीर्थयात्रियों के लिए वरदान: जगन्नाथ मंदिर आने वाले सालाना 2 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अब शहर के विभिन्न कोनों में स्थापित 400 से अधिक वाटर फाउंटेन का लाभ उठा रहे हैं।
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‘जलसाथी’ महिलाओं ने संभाली कमान
इस मिशन की रीढ़ ‘जलसाथी’ महिलाएं हैं, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ये महिलाएं न केवल पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच कर रही हैं, बल्कि मीटर रीडिंग और बिलिंग का प्रबंधन भी कुशलतापूर्वक संभाल रही हैं। यह मॉडल महिला सशक्तिकरण का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है।
पूरे ओडिशा में फैलेगा जाल
पुरी की अपार सफलता को देखते हुए ओडिशा सरकार ने वर्ष 2026 के अंत तक राज्य के सभी 114 शहरी क्षेत्रों में इस सुविधा को पहुँचाने का लक्ष्य रखा है, सरकार का मानना है कि ‘ड्रिंक फ्रॉम टैप’ मिशन न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर है, बल्कि यह एक आधुनिक और स्मार्ट सिटी की पहचान भी है।
















