
सरकारी नौकरियों में आरक्षण और नियुक्तियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने आज एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘अनारक्षित’ या सामान्य श्रेणी की सीटें किसी विशेष वर्ग के लिए “आरक्षित” नहीं हैं, बल्कि ये पूरी तरह से योग्यता (मेरिट) पर आधारित हैं।
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मेरिट वाले उम्मीदवारों के लिए खुले जनरल कैटेगरी के दरवाजे
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जी. मसीह की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि यदि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग (EWS) का कोई उम्मीदवार सामान्य श्रेणी के बराबर अंक प्राप्त करता है, तो उसे ‘जनरल कैटेगरी’ की सीट पर नियुक्ति पाने का पूरा अधिकार है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां और फैसले के मुख्य बिंदु
- ‘ओपन कैटेगरी’ का मतलब ‘सबके लिए खुला’: कोर्ट ने साफ किया कि ‘अनारक्षित’ श्रेणी का अर्थ है कि इसमें कोई भी जातिगत सीमा नहीं है। यह वर्ग केवल मेरिट के आधार पर भरा जाना चाहिए, जिसमें किसी भी वर्ग का मेधावी छात्र अपनी जगह बना सकता है।
- हाई कोर्ट का फैसला पलटा: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस पुराने तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को जनरल सीट देना “दोहरा लाभ” (Double Benefit) देने जैसा होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि मेरिट के आधार पर सीट हासिल करना आरक्षण का लाभ नहीं, बल्कि उम्मीदवार की काबिलियत है।
- समानता का संवैधानिक अधिकार: अदालत ने जोर देकर कहा कि मेधावी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सामान्य सीटों से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (अवसर की समानता) का सीधा उल्लंघन है।
- चयन प्रक्रिया में स्पष्टता: फैसले के अनुसार, यदि कोई उम्मीदवार लिखित परीक्षा में सामान्य वर्ग के कट-ऑफ को पार कर लेता है, तो इंटरव्यू के दौरान भी उसे सामान्य श्रेणी का ही अभ्यर्थी माना जाएगा और उसे उसी सूची में स्थान दिया जाएगा।
क्यों आया यह फैसला?
यह पूरा मामला राजस्थान की एक भर्ती परीक्षा से जुड़ा था। वहां कुछ आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों ने जनरल कैटेगरी के कट-ऑफ से भी ज्यादा अंक प्राप्त किए थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें सामान्य वर्ग में जगह देने के बजाय केवल आरक्षित सीटों तक सीमित रखा था, सुप्रीम कोर्ट ने अब इस विसंगति को दूर करते हुए पूरे देश के लिए स्थिति स्पष्ट कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता आएगी, अब सामान्य श्रेणी की सीटों पर केवल वही अभ्यर्थी काबिज होंगे जो मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर होंगे, चाहे वे किसी भी जाति या वर्ग से संबंध रखते हों।
अधिक जानकारी और कानूनी बारीकियों के लिए आप सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट पर विस्तृत निर्णय देख सकते हैं।
















