
करनाल जिले के पधाना गांव में स्थित करीब 86 एकड़ (607 कनाल 12 मरले) पंचायती भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने की प्रक्रिया तेज हो गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट (Punjab & Haryana High Court) के स्पष्ट आदेशों के बाद जिला प्रशासन, पंचायत विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की निशानदेही (Demarcation) शुरू कर दी है। प्रशासन का लक्ष्य तय समयसीमा के भीतर भूमि को पूरी तरह खाली कराकर नियमों के अनुसार इसकी नीलामी (Auction Process) संपन्न कराना है।
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हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आया प्रशासन
यह मामला तब चर्चा में आया जब पधाना गांव के निवासी देशराज सहित अन्य ग्रामीणों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि गांव की यह बहुमूल्य पंचायती भूमि, जो पहले पशुओं के चरागाह (Grazing Land) के रूप में उपयोग में लाई जाती थी, उसे बाद में कुछ लोगों को बिना किसी सार्वजनिक बोली प्रक्रिया के उपयोग के लिए दे दिया गया।
ग्रामीणों का कहना था कि इस प्रक्रिया से न केवल सरकारी नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि पंचायत को मिलने वाली संभावित आमदनी भी प्रभावित हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने करनाल के डिप्टी कमिश्नर (DC Karnal) को सख्त निर्देश दिए कि भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर उसकी नीलामी कराई जाए।
दो महीने की समयसीमा, 18 जनवरी तक कब्जा हटाने का लक्ष्य
हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को दो महीने के भीतर पूरा करने के आदेश दिए थे। इन्हीं आदेशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
बीडीपीओ (BDPO) साहिब सिंह ने जानकारी दी कि पंचायत और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम, जिसमें कानूनगो और पटवारी शामिल हैं, गांव में पहुंचकर भूमि की सटीक निशानदेही कर रही है।
उन्होंने बताया कि प्रशासन का लक्ष्य 18 जनवरी तक पूरी 86 एकड़ भूमि को कब्जा मुक्त कराना है। इसके बाद कोर्ट के आदेशानुसार नीलामी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि पंचायत को नियमित और पारदर्शी आय सुनिश्चित हो सके।
हर साल 46 लाख रुपये के नुकसान का आरोप
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी दावा किया कि पंचायत द्वारा कई वर्षों तक इस भूमि की नीलामी न कराने से सरकार और पंचायत को हर साल करीब 46 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।
नियमों के अनुसार इस तरह की पंचायती भूमि को सार्वजनिक बोली (Public Auction) के माध्यम से ठेके पर दिया जा सकता था, जिससे पंचायत की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती। लेकिन कथित रूप से कुछ लोगों को बिना बोली के भूमि दे दिए जाने से न केवल राजस्व का नुकसान हुआ, बल्कि पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए।
संयुक्त टीम कर रही है सख्त निगरानी
प्रशासन ने साफ किया है कि इस बार कार्रवाई में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पंचायत विभाग, राजस्व विभाग और जिला प्रशासन की टीमें मिलकर पूरे मामले की निगरानी कर रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, निशानदेही पूरी होने के बाद अवैध कब्जाधारियों को हटाने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। यदि किसी ने आदेशों की अवहेलना की तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई (Legal Action) भी की जा सकती है।
नीलामी से पंचायत की आय बढ़ने की उम्मीद
भूमि के कब्जा मुक्त होने के बाद इसकी नीलामी कराए जाने से पंचायत की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि 86 एकड़ जैसी बड़ी भूमि की नीलामी से पंचायत को लाखों रुपये की नियमित आय हो सकती है, जिसका उपयोग गांव के विकास कार्यों—जैसे सड़क, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट और अन्य बुनियादी सुविधाओं—में किया जा सकता है।
ग्रामीणों में कार्रवाई को लेकर संतोष
गांव के कई ग्रामीणों ने प्रशासन की इस कार्रवाई पर संतोष जताया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते यह कदम न उठाया जाता तो पंचायत की संपत्ति पर अवैध कब्जे और बढ़ सकते थे।
ग्रामीणों को उम्मीद है कि अब हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पंचायत की जमीन का सही उपयोग होगा और गांव के सामूहिक हित में फैसले लिए जाएंगे।
















