
देश में प्रदूषण को कम करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) पर अपनी नई सब्सिडी नीति को विस्तार दिया है, PM E-Drive (पीएम ई-ड्राइव) योजना के तहत अब दोपहिया और तिपहिया वाहनों की खरीद पर सीधी छूट दी जा रही है, 2026 तक चलने वाली इस योजना का लक्ष्य मध्यम वर्ग को किफायती दाम पर इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराना है।
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दोपहिया वाहनों के लिए घटी सब्सिडी, जानें नया गणित
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों (e-2W) के लिए सब्सिडी के नियमों में बदलाव किया है, नई दरों के मुताबिक, अब ग्राहकों को ₹2,500 प्रति किलोवाट ऑवर (kWh) की दर से वित्तीय सहायता मिलेगी, हालांकि, सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा ₹5,000 प्रति वाहन तय कर दी है, इसका मतलब है कि अब उच्च क्षमता वाली बैटरी वाले स्कूटरों पर भी अधिकतम छूट 5 हजार रुपये तक ही सीमित रहेगी।
चारपहिया वाहनों के लिए क्या हैं नियम?
निजी इलेक्ट्रिक कार खरीदने वालों के लिए केंद्र सरकार ने इस बार सब्सिडी के बजाय टैक्स लाभ पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है:
- इनकम टैक्स में छूट: खरीदार आयकर की धारा 80EEB के तहत इलेक्ट्रिक कार लोन के ब्याज पर ₹1.5 लाख तक की कटौती का दावा कर सकते हैं।
- राज्य सरकारों का साथ: उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्य अब भी अपनी ईवी पॉलिसी के तहत ₹50,000 से ₹1 लाख तक की सीधी सब्सिडी और 100% रोड टैक्स माफी दे रहे हैं।
- GST का फायदा: इलेक्ट्रिक कारों पर केवल 5% GST लगता है, जो पेट्रोल-डीजल कारों (28% GST) के मुकाबले काफी कम है।
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तिपहिया और वाणिज्यिक वाहनों पर बड़ी राहत
ई-रिक्शा और ई-कार्ट की बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने इनके लिए सब्सिडी जारी रखी है, 2026 के बजट प्रावधानों के अनुसार, ई-रिक्शा पर अधिकतम ₹12,500 और L5 श्रेणी के तिपहिया वाहनों पर ₹25,000 तक की सब्सिडी दी जा रही है।
कैसे उठाएं लाभ? ई-वाउचर है अनिवार्य
सब्सिडी की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने ‘ई-वाउचर’ सिस्टम लागू किया है, खरीदारों को PM E-Drive ऐप के माध्यम से आधार ई-केवाईसी (e-KYC) कर एक वाउचर जेनरेट करना होगा, वाहन खरीदते समय इस वाउचर को डीलर को सौंपना होगा, जिसके बाद ही सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा।
अगर आप 2026 में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह सब्सिडी का लाभ उठाने का अंतिम चरण हो सकता है क्योंकि सरकार धीरे-धीरे इन रियायतों को कम कर रही है, विस्तृत जानकारी के लिए ग्राहक भारी उद्योग मंत्रालय के पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
















