देश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले लाखों शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। लंबे समय से टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) की चिंता ने इनकी जिंदगी मुश्किल बना दी थी। अब केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से पुराने शिक्षकों का पूरा ब्योरा मांगा है। क्या यह TET से छूट का रास्ता साफ करेगा?

Table of Contents
अनुभवी शिक्षकों पर TET का कहर
कई शिक्षक 15-20 साल से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। लेकिन TET न पास करने की वजह से उनकी नौकरी दांव पर लग गई। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि TET बिना कोई शिक्षक वैध नहीं। कोर्ट ने दो साल का समय दिया पास करने को। फेल होने पर नौकरी जा सकती है या समय से पहले रिटायरमेंट। जिनके पास पांच साल से कम सर्विस बची, उन्हें थोड़ी राहत का इशारा दिया।
शिक्षक सोचते हैं, क्लासरूम संभालें या किताबें चुराएं? उम्रदराज होने पर परीक्षा देना कठिन है। संगठनों ने केंद्र से मांग की, अनुभव को मान्यता दो।
सरकार की पहल
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा विभाग ने 31 दिसंबर को पत्र भेजा। राज्यों को 16 जनवरी तक बताना है, कक्षा 1 से 8 के शिक्षक 2011 से पहले कैसे भर्ती हुए। डेटा में TET पास-फेल, उम्र, योग्यता शामिल। इससे करीब 12 लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। उत्तर प्रदेश में 1.86 लाख, राजस्थान में 80 हजार, मध्य प्रदेश में 3 लाख, झारखंड में 27 हजार ऐसे केस।
यह कदम दिखाता है, सरकार फैक्ट्स जुटा रही। बिना पूरी जानकारी कोई फैसला नहीं।
यह भी देखें- Ration Card Warning: राशन कार्ड धारकों के लिए बुरी खबर! 30 जून के बाद बंद हो जाएगा राशन, जल्दी करें E-KYC
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने RTE कानून का हवाला देकर TET को जरूरी बताया। लेकिन अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया। दो साल में पास न करो तो सर्विस प्रभावित। पुराने शिक्षकों के लिए विशेष व्यवस्था संभव।
छूट मिलेगी या नहीं?
रिपोर्ट आने के बाद केंद्र फैसला लेगा। संभावना है, 2011 पूर्व भर्ती वालों को छूट या वैकल्पिक ट्रेनिंग। इससे लाखों परिवार सुरक्षित होंगे। शिक्षक संगठन आशावादी हैं। अनुभव TET से ऊपर है।
शिक्षकों को सलाह: विभाग की अपडेट चेक करें, डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें। अगर छूट मिली तो शिक्षा प्रणाली मजबूत होगी। सबकी नजर 16 जनवरी पर। क्या बदलेगा शिक्षकों का भविष्य?
















