
वैवाहिक विवादों और तलाक के बढ़ते मामलों के बीच अक्सर यह सवाल उठता है कि अलग होने के बाद पति की संपत्ति, घर और गहनों पर पत्नी का कितना अधिकार होगा? साल 2026 के कानूनी परिदृश्य और सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम व्याख्याओं के आधार पर, संपत्ति के बंटवारे को लेकर स्थिति अब काफी स्पष्ट हो चुकी है।
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‘स्त्रीधन’ पर पत्नी का पूर्ण एकाधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई फैसलों में यह साफ कर दिया है कि ‘स्त्रीधन’ पर केवल और केवल पत्नी का अधिकार है। इसमें शादी के समय मिले जेवर, उपहार, नकद और अन्य कीमती सामान शामिल हैं, पति या ससुराल पक्ष इसे अपने पास नहीं रख सकता। तलाक की स्थिति में पति को यह सारा सामान सुरक्षित रूप से पत्नी को लौटाना अनिवार्य है।
खुद की कमाई से खरीदी संपत्ति (Self-acquired Property)
कानून के अनुसार, यदि पति ने अपनी कमाई से कोई घर या जमीन खरीदी है और वह केवल पति के नाम पर दर्ज है, तो पत्नी उस पर सीधे मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकती, हालांकि, तलाक के दौरान ‘परिवहन और भरण-पोषण’ (Alimony) की राशि तय करते समय कोर्ट पति की इस संपत्ति के मूल्य को ध्यान में रखता है, ताकि पत्नी को सम्मानजनक गुजारा भत्ता मिल सके।
साझा घर में रहने का अधिकार (Right to Residence)
सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण आदेश के अनुसार, घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पत्नी को ‘साझा घर’ (Shared Household) में रहने का कानूनी अधिकार प्राप्त है, भले ही घर पति के नाम पर न होकर ससुराल के किसी अन्य सदस्य के नाम पर हो, तलाक की प्रक्रिया लंबित रहने तक पत्नी को घर से बेदखल नहीं किया जा सकता।
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पैतृक संपत्ति पर क्या है नियम?
पति को विरासत में मिली पैतृक संपत्ति पर पत्नी का कोई सीधा कानूनी दावा नहीं बनता है, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत, ऐसी संपत्ति में केवल रक्त संबंधियों (जैसे बच्चों) का अधिकार होता है, पत्नी केवल अपने और अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए इस संपत्ति से होने वाली आय में से हिस्से की मांग कोर्ट के माध्यम से कर सकती है।
संयुक्त संपत्ति (Joint Property)
अगर कोई प्रॉपर्टी पति और पत्नी दोनों के नाम पर संयुक्त रुप से (Jointly) खरीदी गई है, तो पत्नी उस संपत्ति में अपने हिस्से (आमतौर पर 50%) की हकदार होती है, यदि पत्नी ने खरीदारी में वित्तीय योगदान दिया है, तो वह अदालत में प्रमाण प्रस्तुत कर अपना दावा मजबूत कर सकती है।
बैंक बैलेंस और वित्तीय निवेश
बैंक खातों और निवेशों (FD, शेयर्स आदि) के मामले में भी मालिकाना हक उसी का होता है जिसके नाम पर निवेश है, हालांकि, कोर्ट बच्चे की शिक्षा और भविष्य के लिए पति की वित्तीय स्थिति के आधार पर एकमुश्त बड़ी राशि (Lump sum alimony) दिलाने का आदेश दे सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 में अदालतों का रुख महिलाओं के वित्तीय संरक्षण की ओर अधिक है, हालांकि संपत्ति पर सीधा मालिकाना हक नाम और योगदान पर निर्भर करता है, लेकिन ‘उचित गुजारा भत्ता’ (Fair Alimony) के जरिए कोर्ट यह सुनिश्चित करता है कि तलाक के बाद महिला का जीवन स्तर प्रभावित न हो।
















