
मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को लेकर अगर आपके मन में भी यह कन्फ्यूजन है कि आधार कार्ड जरूरी है या नहीं, तो अब जवाब साफ है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपनी पोज़ीशन बिल्कुल क्लियर कर दी है आधार सिर्फ पहचान के लिए है, न कि नागरिकता के सबूत के तौर पर।
दरअसल, एक हलफनामे में चुनाव आयोग ने बताया कि देशभर के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार कार्ड को किसी भी हाल में अनिवार्य आधार न माना जाए। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 23(4) के हिसाब से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि आधार का उपयोग सिर्फ आवेदक की पहचान सुनिश्चित करने के लिए किया जा सकता है, उससे ज़्यादा नहीं।
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आधार कार्ड नागरिकता प्रमाण नहीं
सुप्रीम कोर्ट की पीठ (जिसकी अध्यक्षता जस्टिस सूर्यकांत कर रहे थे) को आयोग ने यह भी बताया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। किसी व्यक्ति के पास आधार है या नहीं यह मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने का कारण नहीं बन सकता। यूआईडीएआई भी पहले ही साफ कर चुका है कि आधार को नागरिकता, निवास या जन्मतिथि का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यानी आधार सिर्फ एक सरकारी पहचान पत्र है, उससे आगे कुछ नहीं।
बिहार की मतदाता सूची का उदाहरण
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग ने यह भी बताया कि बिहार की संशोधित मतदाता सूची में भी नाम जोड़ने या हटाने के लिए आधार कार्ड का उपयोग नहीं किया गया है। निर्देश पहले ही जारी कर दिए गए थे। मतलब अब इसे लेकर किसी भी तरह की गलतफहमी की गुंजाइश नहीं बचती।
कुल मिलाकर, वोटर लिस्ट में आपका नाम शामिल करने के लिए आधार कार्ड जरूरी नहीं है, हाँ वेरिफिकेशन में मदद जरूर करता है। अगर आप नया वोटर ID बनवा रहे हैं या बदलाव करवा रहे हैं, तो ध्यान रखें कि आधार एक optional document है, mandatory नहीं।
















