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नीतीश कुमार की पेंशन जानकर रह जाएंगे दंग, मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री की सैलरी से भी ज्यादा मिलता है पैसा!

10वीं बार मुख्यमंत्री बने नीतीश कुमार की सैलरी और पेंशन से जुड़ा वो सच जो आप नहीं जानते। पूरा राजनीतिक सफर और सेवाकाल आखिर कैसे बनाते हैं उनकी पेंशन मुख्यमंत्री वेतन से भी ज्यादा? पूरी कहानी यहां पढ़ें!

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नीतीश कुमार के 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही लोगों में उनकी सैलरी और पेंशन को लेकर जिज्ञासा बढ़ गई है। इस लेख में इन सवालों का विस्तार से जवाब दिया गया है, जिसे किसी अन्य आर्टिकल के संदर्भ से मुक्त और नए अंदाज में प्रस्तुत किया गया है।

नीतीश कुमार की पेंशन जानकर रह जाएंगे दंग, मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री की सैलरी से भी ज्यादा मिलता है पैसा!

नीतीश कुमार का 10वां मुख्यमंत्री कार्यकाल

बिहार की राजनीति में एक नई मिसाल बनाते हुए, नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। पटना के गांधी मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में पीएम नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा समेत कई राज्य मुख्यमंत्री और बड़े नेता मौजूद रहे। नीतीश कुमार ने पहली बार नवंबर 2005 में मुख्यमंत्री पद संभाला था और तब से लगातार उनका प्रभावी राजनैतिक सफर जारी है।

मुख्यमंत्री पद और पेंशन का संबंध नहीं

शीर्ष पदों पर रहते हुए भी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के लिए कोई विशेष पेंशन नहीं होती। देश की नियमावली के अनुसार पेंशन का निर्धारण विधायक और सांसद के कुल सेवाकाल के आधार पर किया जाता है। बिहार के विधानमंडल के नियमों के अनुसार, जितने वर्षों तक कोई विधायक रहा होगा, उसी हिसाब से पेंशन मिलती है। मुख्यमंत्री बनने की संख्या से इसे कोई जोड़ नहीं होता।

विधायक और सांसद के रूप में नीतीश का सेवाकाल

नीतीश कुमार 1985 से विधायक और 1989 से 2004 तक सांसद रहे। विधायक के रूप में उनकी न्यूनतम पेंशन 45,000 रुपए प्रति माह है, और उनके 39 अतिरिक्त वर्षों के लिए प्रति वर्ष 4,000 रुपए की वृद्धि होती है। इसलिए विधायक पेंशन लगभग 2,01,000 रुपए प्रति माह बनती है। वहीं सांसद के रूप में उनकी पेंशन लगभग 68,500 रुपए प्रति माह आंकी गई है। दोनों को मिलाकर उनकी कुल पेंशन 2,69,000 रुपए से अधिक है, जो मुख्यमंत्री की वेतन 2.50 लाख रुपए से ऊपर है।

पेंशन में वृद्धि मुख्यमंत्री पद से नहीं

लोग अक्सर सोचते हैं कि 10 बार मुख्यमंत्री बनने पर पेंशन कई गुना बढ़ जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं है। पेंशन का निर्धारण कुल सेवा काल के आधार पर होता है। इसलिये नीतीश कुमार की पेंशन उनके बहुमुखी राजनीतिक जीवनकाल के कारण उच्च स्तर पर है, ना कि मुख्यमंत्री पद की संख्या के कारण।

अलग-अलग राज्यों में विधायक वेतन-पेंशन का अंतर

भारत के विभिन्न राज्यों में विधायकों का वेतन और पेंशन बड़े स्तर पर भिन्न होता है। तेलंगाना में सबसे अधिक, 2.50 लाख रुपए प्रति माह सैलरी मिलती है, जबकि केरल में सबसे कम, केवल 70 हजार रुपए प्रति माह। बिहार में विधायक की सैलरी करीब 1.60 लाख रुपए है। इसी आधार पर पेंशन तय होती है।

इस प्रकार, नीतीश कुमार के 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उनकी पेंशन उनके समग्र सेवाकाल पर आधारित है जो अनुमानित तौर पर 2,69,000 रुपए से ऊपर है। यह उनकी मुख्यमंत्री वेतन से भी अधिक है, जो उनकी लंबे समय की राजनीतिक सेवा का सम्मान है। यह स्पष्ट करता है कि पेंशन व्यवस्था सेवा की अवधि को महत्व देती है, न कि पदों की संख्या को।

Author
Divya

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