Join Contact

CNAP Service Launched: स्कैमर्स की अब खैर नहीं! कॉल आते ही स्क्रीन पर दिखेगा व्यक्ति का आधार वाला नाम

यह CNAP सुविधा आपके मोबाइल पर आने वाली अनजान कॉल्स का असली आधार से वेरीफाइड नाम दिखाएगी, जिससे स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर काबू मिलेगा। इससे पहले कॉल रिसीव करते वक्त आपको पता चलेगा कि असल में कौन कॉल कर रहा है। यह सुविधा 4G और 5G नेटवर्क के लिए मार्च 2026 तक पूरे देश में लागू हो जाएगी, और यूजर को इसे ऑप्ट-आउट करने का भी विकल्प मिलेगा।​

Published On:
now caller aadhaar verified name appear on screen scammers will fail cnap portal launched

CNAP (Calling Name Presentation) सिस्टम भारत सरकार की एक नई पहल है, जिसका लक्ष्य मोबाइल कॉल्स को ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। CNAP के आने से अब आपकी स्क्रीन पर कॉल करने वाले का असली Aadhaar-Verified नाम दिखेगा, जिससे स्पैम और फ्रॉड कॉल्स पर रोक लगेगी। आइए विस्तार से जानते हैं, CNAP के फायदे, सिस्टम की प्रक्रिया और इससे जुड़े प्राइवेसी कन्सर्न्स के बारे में।

CNAP क्या है और कैसे काम करता है?

CNAP यानी Calling Name Presentation एक सरकारी सिस्टम है, जिसमें जब भी कोई अनजान नंबर से कॉल आती है, उस नंबर की SIM खरीदते वक्त जो नाम आधार के साथ KYC में डाला गया था, वही आपके फोन की स्क्रीन पर नजर आएगा। यानी अब कोई भी कॉल करे, तो ‘पापा’, ‘मम्मी’ या ‘दोस्त’ जैसे नाम बाद में दिखेंगे, सबसे पहले सरकार के रजिस्टर में मौजूद असली नाम नजर आएगा।​​

CNAP के बड़े फायदे

  • स्पैम कॉल्स और फ्रॉड से बचाव: अब स्पैम या फ्रॉड कॉलर आसानी से पहचान में आ जाएंगे। इससे लोग कॉल उठाने से पहले ही तय कर सकते हैं कि उन्हें किससे बात करनी है।​
  • Truecaller पर निर्भरता कम: पहले लोग कॉलर की पहचान के लिए थर्ड-पार्टी ऐप्स जैसे Truecaller पर निर्भर रहते थे, लेकिन अब सरकारी डेटाबेस से सीधा असली नाम मिल जाएगा।
  • नेटवर्क इंडिपेंडेंट: CNAP के लिए आपके पास इंटरनेट होना जरूरी नहीं, यह मोबाइल नेटवर्क के जरिए काम करेगा।
  • पायलट फेज में सफलता: CNAP का पहला ट्रायल दिल्ली, मुंबई सहित कुछ बड़े शहरों में सफल रहा है और आने वाले महीनों में यह पूरे देश में लागू होने वाला है।​

प्राइवेसी और सुरक्षा को लेकर सवाल

  • प्राइवेसी का खतरा: कई विशेषज्ञों और संगठनों का मानना है कि CNAP से व्यक्तिगत जानकारी सार्वजनिक होने का जोखिम बढ़ सकता है। जैसे—अगर कोई डॉक्टर, वकील, पत्रकार या मनोवैज्ञानिक किसी से बात करना चाहे और अपना नाम छिपाना चाहे, तो अब वह संभव नहीं होगा।
  • डेटा सिक्योरिटी: SIM कार्ड के KYC डेटा का बड़े लेवल पर इस्तेमाल, डेटा लीक या हैकिंग की संभावना को बढ़ाता है। यदि CNAP डेटाबेस में सेंध लगी तो लाखों लोगों की निजी जानकारी खतरे में पड़ सकती है।
  • ऑप्ट-आउट का विकल्प: TRAI ने CNAP के लिए डिफॉल्ट ऑन फीचर का प्रस्ताव रखा है, लेकिन लोग चाहें तो भविष्य में इससे बाहर रह सकते हैं यानी ऑप्ट-आउट कर सकते हैं। हालांकि, ये विकल्प सभी यूजर्स के लिए स्पष्ट नहीं है।

CNAP का भविष्य और आपकी राय

भारत में CNAP सिस्टम टेक्नोलॉजी व डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा कदम है। इससे टेलीकॉम सेक्टर में पारदर्शिता, सुरक्षा और यूजर एक्सपीरियंस में बड़ा बदलाव आ सकता है। लेकिन इसकी सफलता तभी मुमकिन है जब प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम बनें और हर यूजर को ऑप्ट-इन/आउट करने का मूल अधिकार मिले। यह सिस्टम आम यूजर से लेकर प्रोफेशनल तक, सभी के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है—बस जरूरत है सही बैलेंस और सुरक्षित इम्प्लिमेंटेशन की।

Author
Divya

Leave a Comment

संबंधित समाचार

🔥Hot विडिओ देखें