
पूर्वी उत्तर प्रदेश की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राज्य की राजधानी लखनऊ को बहराइच से सीधे जोड़ने की बहुप्रतीक्षित योजना अब जमीन पर उतरती नजर आ रही है। बहराइच और जरवलरोड के बीच 65 किलोमीटर लंबी नई ब्रॉडगेज रेल लाइन बिछाने की परियोजना को गति मिल गई है, जिस पर कुल 530 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डीपीआर (Detailed Project Report) को मंजूरी मिलने के बाद अब इस रूट पर पड़ने वाले 62 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
Table of Contents
परियोजना का उद्देश्य: राजधानी से सीधा रेल संपर्क
इस नई रेल लाइन का मुख्य उद्देश्य बहराइच सहित आसपास के जिलों को राजधानी लखनऊ से बेहतर, तेज और किफायती रेल सेवा उपलब्ध कराना है। वर्तमान में बहराइच से लखनऊ की यात्रा में समय और संसाधन दोनों अधिक लगते हैं, लेकिन इस नई लाइन के शुरू होने के बाद यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस रेल मार्ग के चालू होने से न केवल बहराइच बल्कि श्रावस्ती, बलरामपुर और नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों के यात्रियों को भी राजधानी तक पहुंचने में सुविधा होगी।
65 किलोमीटर की ब्रॉडगेज लाइन, 530 करोड़ का निवेश
जरवलरोड से बहराइच के बीच प्रस्तावित यह रेल लाइन 65 किलोमीटर लंबी ब्रॉडगेज (Broad Gauge) होगी। रेलवे विभाग ने इस परियोजना के लिए लगभग 530 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व रेलवे की ओर से इस रूट का सर्वे कराया गया था, जिसके आधार पर डीपीआर तैयार की गई।
डीपीआर के अनुसार, यह परियोजना तकनीकी रूप से पूरी तरह व्यवहारिक है और क्षेत्रीय विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
तीन नए रेलवे स्टेशन और एक हाल्ट का निर्माण
नई रेल लाइन के तहत यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीन रेलवे स्टेशन और एक हाल्ट बनाए जाने का प्रस्ताव है। डीपीआर में जिन स्टेशनों को शामिल किया गया है, वे हैं:
- जरवल कस्बा रेलवे स्टेशन
- कैसरगंज रेलवे स्टेशन
- फखरपुर रेलवे स्टेशन
- परसेंडी शुगर मिल के पास एक हाल्ट
इन स्टेशनों के निर्माण से आसपास के ग्रामीण इलाकों को सीधा रेल नेटवर्क मिलेगा, जिससे आवागमन के साथ-साथ व्यापार और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
62 गांवों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज
रेल लाइन बिछाने के लिए कैसरगंज और बहराइच तहसील के कुल 62 गांवों में किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। इसमें कैसरगंज तहसील के 18 गांव और बहराइच तहसील के 24 गांव प्रमुख रूप से शामिल हैं।
कैसरगंज तहसील के जिन गांवों में भूमि अधिग्रहण होगा, उनमें शामिल हैं:
- टेंड़वा महंत
- हैबतपुर
- पंदूर
- घासीपुर
- दतौली
- खपुरवा
- टेंडवा अल्पीमिश्र सहित अन्य गांव
वहीं बहराइच तहसील के अंतर्गत जिन गांवों की जमीन ली जाएगी, उनमें प्रमुख हैं:
- अमीनपुर नगरौर
- नगरौर
- मसीहाबाद
- गोकुलपुर
- गुदुआपुर सहित अन्य गांव
किसानों से बातचीत, बनी सहमति
भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रशासन ने किसानों से बातचीत शुरू कर दी है। अधिगृहीत अधिकारी एवं सिटी मजिस्ट्रेट राजेश प्रसाद के अनुसार, किसानों के साथ सामंजस्य स्थापित हो चुका है और अधिकतर मामलों में सहमति बन गई है।
उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है और इसे समयबद्ध तरीके से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि परियोजना में किसी प्रकार की देरी न हो।
2027 तक रेल लाइन के चालू होने की उम्मीद
रेलवे विभाग का लक्ष्य है कि यह नई बहराइच–जरवलरोड रेल लाइन वर्ष 2027 तक चालू कर दी जाए। इसके पूरा होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश में रेल नेटवर्क को नया आयाम मिलेगा और क्षेत्रीय विकास को भी रफ्तार मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भविष्य में पर्यटन, कृषि व्यापार और सीमावर्ती क्षेत्रों के आवागमन को भी मजबूती देगी।
पूर्वी यूपी के विकास को मिलेगा नया आधार
इस रेल लाइन के शुरू होने से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक विकास में भी सहायक बनेगी। कम खर्च में सुरक्षित और तेज यात्रा की सुविधा आम जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाएगी।
















