
अगर आपने भी कभी मोबाइल फोन ईएमआई (EMI) पर खरीदा है, तो यह खबर आपके लिए थोड़ी चौंकाने वाली हो सकती है। अब तक जहां तक आपने ईएमआई रिमाइंडर केवल SMS, E-mail या WhatsApp पर ही देखे हैं, वहीं अब कुछ ग्राहकों के फोन पर ईएमआई रिमाइंडर वॉलपेपर के रूप में नजर आ रहे हैं और दिलचस्प बात यह है कि यह वॉलपेपर हटाने की कोशिश करने पर भी नहीं हटता!
यानी अगर आपने ईएमआई भरने में देरी की, तो आपका फोन खुद आपके खिलाफ खड़ा हो जाएगा। स्क्रीन पर आपका बकाया संदेश दिखेगा और फोन का पूरा वॉलपेपर बदल जाएगा।
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कैसे हुआ यह मामला चर्चा में
यह मामला तब सामने आया जब एक एक्स (Twitter) यूजर प्रियेश शर्मा ने अपनी पोस्ट में एक नर्स का अनुभव साझा किया। नर्स ने बताया कि उन्होंने ईएमआई पर मोबाइल खरीदा था और महीने की 4 तारीख को उनकी किस्त कट भी चुकी थी, लेकिन उसी दिन उनका फोन अचानक डरावना बन गया। फोन की स्क्रीन पर वॉलपेपर बदल गया और उस पर संदेश लिखा था “आपने अपनी इंस्टालमेंट का भुगतान नहीं किया है, इसलिए आपकी स्क्रीन शर्तों के अनुसार बदली गई है।”
नर्स ने तुरंत कस्टमर केयर से संपर्क किया लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपनी दिक्कत साझा की और वहीं से पता चला कि ऐसा कई अन्य ग्राहकों के साथ भी हो रहा है।
मोबाइल कंपनियां और फाइनेंस एजेंसियां कैसे करती हैं यह सब
दरअसल, जब कोई ग्राहक फोन EMI पर खरीदता है, तो फाइनेंस एजेंसी या बैंक फोन में पहले से एक कस्टम ऐप (Pre-installed App) इंस्टॉल कर देती है। इस ऐप को फोन के लगभग हर डेटा और फीचर की एक्सेस होती है जैसे स्क्रीन कंट्रोल, नेटवर्क, कैमरा और IMEI तक।
यह ऐप फोन में छुपे “Device Management Permission” के ज़रिए तब सक्रिय होता है जब ग्राहक ईएमआई भुगतान में देरी करता है। इसके बाद यह फोन का वॉलपेपर बदल सकता है, फोन को लॉक कर सकता है या यहां तक कि IMEI ब्लैकलिस्ट भी कर सकता है। यानी एक तरह से यह ऐप आपकी डिवाइस को “remotely control” करने की क्षमता रखता है।
प्राइवेसी को लेकर उठ रहे सवाल
अब सवाल यह उठता है कि क्या ऐसी ऐप परमिशन्स यूजर की प्राइवेसी राइट्स का उल्लंघन करती हैं? कई साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही यूजर लोन के वक़्त नियम और शर्तों से सहमत होता है, फिर भी किसी का वॉलपेपर बदलना, फोन लॉक करना या व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच बनाना यूज़र प्राइवेसी में हस्तक्षेप है।
कुछ यूजर्स ने यह भी दावा किया है कि फोन में मौजूद यह ऐप उनके कॉन्टैक्ट्स और गैलरी तक एक्सेस मांगता है, जो खतरनाक स्थिति है। इससे न केवल यूज़र की निजता खतरे में है, बल्कि यह साइबर सिक्योरिटी के लिए भी बड़ा मुद्दा बन सकता है।
क्या कहती हैं वित्तीय एजेंसियाँ और RBI
कुछ समय पहले ऐसी खबरें आई थीं कि RBI (भारतीय रिजर्व बैंक) लोन देने वाली कंपनियों को “फोन लॉकिंग फीचर” की सीमित अनुमति देने पर विचार कर रही है, ताकि भुगतान में देरी होने पर बैंक केवल डिवाइस की सर्विसिज रोक सके।
हालांकि, फिलहाल RBI ने ऐसी कोई आधिकारिक अनुमति नहीं दी है। इसके बावजूद, कुछ फाइनेंस कंपनियाँ अपनी मनमर्जी से ऐसी ऐप्स इंस्टॉल कर रही हैं जो फोन का कंट्रोल हासिल कर लेती हैं। जाहिर सी बात है, अगर यह सिस्टम आधिकारिक रूप से लागू किया जाता है, तो उसके लिए सख्त रेगुलेशन और डेटा प्रोटेक्शन के नियम जरूरी होंगे।
ग्राहक क्या कर सकते हैं
अगर आपका फोन EMI पर है, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- हमेशा समय पर अपनी किस्त भरें ताकि फोन लॉक या ब्लॉक न हो।
- किसी भी अज्ञात ऐप को फोन की Accessibility परमिशन न दें।
- अगर फोन में कोई ऐसी ऐप पहले से इंस्टॉल है, तो जानें कि वह कौन सा डेटा एक्सेस कर रही है।
- कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत कंपनी के कस्टमर केयर और साइबर हेल्पलाइन में शिकायत करें।
















