
केंद्रीय बजट 2026-27 में मोदी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए बड़े सुधारों का ऐलान किया है, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ₹10,000 करोड़ के ‘SME ग्रोथ फंड’ की घोषणा करते हुए छोटे उद्यमियों को बड़ी राहत दी है, इस कदम को उद्योग जगत में MSMEs की ‘लॉटरी’ के रूप में देखा जा रहा है।
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इक्विटी और लोन का डबल धमाका
इस स्कीम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह केवल कर्ज देने तक सीमित नहीं है, यह फंड हाई-पोटेंशियल वाले MSMEs को इक्विटी सहायता प्रदान करेगा, जिससे उन्हें विस्तार करने में मदद मिलेगी, इसके अलावा, क्रेडिट गारंटी स्कीम (CGTMSE) के तहत बिना किसी कोलेटरल (बिना गारंटी) के कार्यशील पूंजी (Working Capital) मिलना अब और भी आसान हो जाएगा।
स्कीम की 5 बड़ी बातें
- ₹10,000 करोड़ का विशेष कोष उन फर्मों के लिए बनाया गया है जो अपनी उत्पादकता बढ़ाना और निर्यात क्षेत्र में उतरना चाहती हैं।
- MSMEs को पेमेंट में होने वाली देरी को रोकने के लिए TReDS प्लेटफॉर्म को अब सभी CPSEs (केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों) के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
- ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रिस्क कैपिटल के लिए पहले से मौजूद फंड में ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त निवेश (Top-up) किया गया है।
- टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे उद्यमियों को वित्तीय और कानूनी जटिलताओं से बचाने के लिए ‘कॉर्पोरेट मित्र’ नामक विशेषज्ञों की मदद मिलेगी।
- देश के 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टर्स को आधुनिक बनाया जाएगा ताकि वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक सकें।
छोटे उद्यमियों को क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फंड से उन उद्यमियों को सबसे अधिक लाभ होगा जो फंड की कमी के कारण अपना विस्तार नहीं कर पा रहे थे सरकार का लक्ष्य MSMEs को ‘चैंपियन’ बनाना है ताकि वे भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनाने में अहम भूमिका निभा सकें।
















