
दिल्ली-एनसीआर में रियल एस्टेट सेक्टर बूम पर है, और इसका श्रेय प्रमुख एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे नए शहरों को जाता है, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे जैसे मार्ग कनेक्टिविटी को नया आयाम दे रहे हैं, जिससे आसपास के इलाकों में ज़मीन की कीमतें आसमान छू रही हैं।
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दिल्ली-NCR: एक्सप्रेसवे के किनारे नए शहर
हरियाणा सरकार ने दिल्ली-एनसीआर के विकास के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसके तहत, फरीदाबाद और पलवल जिलों में
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के साथ-साथ 9,000 एकड़ भूमि पर एक आधुनिक औद्योगिक शहर (MIC) बसाया जा रहा है, इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में विनिर्माण और रसद को बढ़ावा देना है, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को सीधा लाभ मिल रहा है।
इसी तरह, KMP एक्सप्रेसवे के दोनों ओर “स्मार्ट सिटी” की तर्ज पर पांच नए शहर विकसित करने की योजना है, जिसके लिए लगभग 700 गांवों की जमीन का उपयोग किया जाएगा।
जमीनों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि
इन प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कारण भूमि की कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है।
- द्वारका एक्सप्रेसवे (Dwarka Expressway): यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर में रियल एस्टेट का एक प्रमुख हॉटस्पॉट बन गया है, पिछले पांच वर्षों में यहाँ संपत्ति की कीमतों में 153% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जो इसे निवेश के लिए सबसे आकर्षक स्थानों में से एक बनाता है।
- यमुना एक्सप्रेसवे (Yamuna Expressway): नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर एयरपोर्ट) और आगामी फिल्म सिटी परियोजना ने इस क्षेत्र में क्रांति ला दी है। यहाँ 4,000 हेक्टेयर से अधिक में एक नया शहर बसाया जाना है, हवाई अड्डे की घोषणा के बाद से ही इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी की कीमतों में 95% से अधिक का उछाल आया है।
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निवेश का नया केंद्र
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क, बुनियादी ढांचे का विकास और नए औद्योगिक व आवासीय क्षेत्रों की स्थापना दिल्ली-एनसीआर को निवेशकों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बना रही है, ये एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा के समय को कम कर रहे हैं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों के नए केंद्र भी स्थापित कर रहे हैं, जिससे ज़मीनों की मांग और कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
















