दिल्ली में पहली क्लास में एडमिशन के लिए न्यूनतम आयु सीमा 6 साल निर्धारित करने का मुद्दा अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। जून 2025 में राज्य सरकार द्वारा जारी किया गया यह नियम सोशल व पेरेंट्स के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। इस नियम को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है जिसमें याचिकाकर्ता ने इसके कई नुकसान हाईकोर्ट के सामने रखे हैं।

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दिल्ली सरकार का सर्कुलर और हाईकोर्ट की सुनवाई
दिल्ली सरकार ने जून 2025 में सभी स्कूलों में पहली कक्षा में एडमिशन के लिए बच्चों की आयु सीमा 6 साल करने का निर्देश जारी किया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए जनहित याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई है। चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय की बेंच ने सरकार को नोटिस जारी कर 13 दिन के अंदर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर निर्धारित की गई है।
6 साल की आयु सीमा पर मुख्य चिंताएं
याचिका में बताया गया है कि इस नियम से कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। सबसे पहला नुकसान है प्रीस्कूल की फीस का भार बढ़ना क्योंकि ऐसे बच्चे जिन्हें अब क्लास-1 में प्रवेश नहीं मिलेगा, उन्हें प्रीस्कूल में एक और साल बिताना होगा। इसके अतिरिक्त, सीमित सीटों के कारण सीधे क्लास-1 में एडमिशन लेना भी कठिन होगा।
अन्य प्रभाव: क्लास रिपीट होना और अतिरिक्त बोझ
नए नियम के तहत जिन बच्चों का प्रमोशन पहली कक्षा में होना था, उन्हें अब प्रीस्कूल या नर्सरी में वापस जाना होगा। इससे एक साल की पढ़ाई दोहरानी पड़ेगी, जो बच्चों और परिवारों दोनों के लिए तनाव बढ़ाने वाला होता है। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह नियम तुरंत लागू न होकर शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू होना चाहिए।
याचिकाकर्ता के सुझाव
जनहित याचिका में सर्कुलर में संशोधन का सुझाव दिया गया है। नर्सरी क्लास में दाखिले के लिए न्यूनतम आयु 4 साल की जानी चाहिए, प्री-स्कूल 1 के लिए 4+ साल, प्री-स्कूल 2 के लिए 5+ साल और पहली कक्षा के लिए 6+ साल की आयु तय की जाए। इसके अलावा ऐकडेमिक ईयर 2026-27 से इस नियम को लागू किया जाना चाहिए ताकि पेरेंट्स और बच्चों को आर्थिक व शैक्षणिक परेशानियों से बचाया जा सके।
प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर चिंता
याचिकाकर्ता ने आयु सीमा के साथ-साथ निजी स्कूलों की बहुत अधिक फीस को भी चिंता का विषय बताया है। वर्तमान में कई निजी स्कूलों में एक तिमाही की फीस लगभग ₹60,000 है, जो सालाना ₹2.4 लाख के करीब जाती है, जिससे आम परिवारों पर भारी आर्थिक दबाव पड़ता है।
















