
भारत में कोर्ट में गवाही (Court Testimony) देने का नियम बहुत स्पष्ट है – सच बोलना अनिवार्य है। लेकिन कई बार लोग हल्के-फुल्के कारणों से या मज़ाक में झूठ बोल देते हैं। वहीं गंभीर मामलों में झूठी गवाही (False Testimony) देने का परिणाम बेहद गंभीर हो सकता है।
आज हम आपको विस्तार से बताएंगे कि अगर आप कोर्ट (Court) में झूठ बोलते हैं, तो आपको कितनी सजा (Punishment) और जुर्माना (Fine) हो सकता है, और किस भारतीय कानून की धारा (IPC Sections) के तहत मामला बनता है।
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झूठी गवाही देने का मतलब क्या है?
कई बार लोग मानते हैं कि “थोड़ा झूठ बोलना कोई बड़ी बात नहीं।” लेकिन कोर्ट में यह बिल्कुल गलत है।
झूठी गवाही (False Testimony) का मतलब है कि आप किसी केस (Case) में जानबूझकर ऐसा बयान (Statement) देते हैं जो सच नहीं है। यह केवल मज़ाक या व्यक्तिगत हित के लिए भी हो सकता है।
गांधीजी हमेशा कहते थे कि “सत्य बोलना और सत्य के मार्ग पर चलना ही सर्वोत्तम है।” और भारतीय कानून भी यही मानता है – कोर्ट में झूठ बोलना कानूनन अपराध है।
कौनसी धारा लागू होती है?
यदि आप कोर्ट में झूठ बोलते हैं, तो भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code – IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला बन सकता है।
- धारा 227 (Section 227 IPC) – झूठी गवाही देने के लिए
- धारा 228 (Section 228 IPC) – झूठा सबूत (Fabricating Evidence) पेश करने के लिए
- धारा 229 (Section 229 IPC) – झूठी गवाही देने पर सजा और जुर्माना
झूठ बोलने पर सजा कितनी है?
भारतीय कानून (IPC) के अनुसार, अगर आप कोर्ट में झूठ बोलते हैं, तो:
- धारा 229 के तहत:
- 3 साल तक की सजा (Imprisonment)
- 5,000 रुपये तक का जुर्माना (Fine)
- या दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं
ध्यान रखें, यह केवल उन मामलों पर लागू होता है जहाँ कोर्ट में झूठ साबित हो जाता है। अगर झूठी गवाही पकड़ी जाती है, तो अलग से मुकदमा (Case) भी चल सकता है।
झूठी गवाही देने के नुकसान
- कानूनी परिणाम (Legal Consequences):
झूठी गवाही देने से न केवल आपको जेल की सजा हो सकती है, बल्कि आपका रिकॉर्ड भी दागदार हो जाता है। - माना जाएगा अपराध (Criminal Liability):
कोर्ट में झूठ बोलना गंभीर अपराध माना जाता है। इसका प्रभाव आपके केस की सफलता पर भी पड़ता है। - जुर्माना और आर्थिक हानि (Financial Penalty):
केवल सजा नहीं, बल्कि जुर्माना भी देना पड़ सकता है, जो केस की गंभीरता पर निर्भर करता है।
कैसे बचें झूठ बोलने से?
अगर आपको खुद के IPO-Initial Public Offering, Renewable Energy-Renewable Energy या किसी अन्य मामले में कोर्ट में गवाही देनी है:
- वकील से सलाह लें (Consult a Lawyer):
अपनी बात को कैसे रखनी है और कैसे सच को साबित करना है, इसके लिए वकील की मदद जरूरी है। - सिर्फ सत्य बोलें (Speak Only the Truth):
कभी भी झूठ बोलने की कोशिश न करें, चाहे मामला कितना भी छोटा क्यों न लगे। - साक्ष्य तैयार करें (Prepare Evidence Carefully):
अपने बयान को सबूतों (Evidence) से समर्थन दें। - मज़ाक में भी न बोलें झूठ (No Jokes in Court):
कोर्ट में मजाक में दिया गया झूठ भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
















