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रजिस्ट्री से पहले ‘EC’ क्यों है जरूरी? इस एक डॉक्यूमेंट के बिना कोर्ट में भी नहीं टिकेगा आपका मालिकाना हक

जमीन या मकान खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी का निवेश होता है अक्सर लोग रजिस्ट्री की प्रक्रिया में जल्दबाजी करते हैं और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नजरअंदाज कर देते हैं, जानकारों का मानना है कि यदि आपने रजिस्ट्री से पहले 'EC' यानी भारमुक्ति प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) की जांच नहीं की, तो आपका मालिकाना हक कानूनी पचड़ों में फंस सकता है

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रजिस्ट्री से पहले 'EC' क्यों है जरूरी? इस एक डॉक्यूमेंट के बिना कोर्ट में भी नहीं टिकेगा आपका मालिकाना हक
रजिस्ट्री से पहले ‘EC’ क्यों है जरूरी? इस एक डॉक्यूमेंट के बिना कोर्ट में भी नहीं टिकेगा आपका मालिकाना हक

जमीन या मकान खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन की सबसे बड़ी पूंजी का निवेश होता है, अक्सर लोग रजिस्ट्री की प्रक्रिया में जल्दबाजी करते हैं और कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नजरअंदाज कर देते हैं, जानकारों का मानना है कि यदि आपने रजिस्ट्री से पहले ‘EC’ यानी भारमुक्ति प्रमाण पत्र (Encumbrance Certificate) की जांच नहीं की, तो आपका मालिकाना हक कानूनी पचड़ों में फंस सकता है।

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क्या है EC और क्यों इसे कहा जाता है ‘सुरक्षा कवच’?

EC एक ऐसा कानूनी दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि जिस संपत्ति को आप खरीदने जा रहे हैं, वह पूरी तरह से ‘भारमुक्त’ है। सरल शब्दों में कहें तो, यह इस बात का सबूत है कि प्रॉपर्टी पर कोई बकाया कर्ज, कानूनी विवाद या मालिकाना हक को लेकर कोई पेचीदगी नहीं है। 

बिना EC के रजिस्ट्री कराने के बड़े जोखिम:

  • कोर्ट में कमजोर पड़ जाएगा पक्ष: कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में उस संपत्ति पर कोई विवाद होता है और आपके पास EC नहीं है, तो अदालत में आपको ‘सच्चा खरीदार’ (Bona Fide Purchaser) साबित करने में भारी मुश्किल आएगी। कोर्ट इसे आपकी लापरवाही मान सकता है।
  • पुराने कर्ज का बोझ: हो सकता है कि पिछले मालिक ने उस प्रॉपर्टी पर बैंक से लोन लिया हो। बिना EC के आपको इस बात का पता नहीं चलेगा और रजिस्ट्री के बाद उस कर्ज को चुकाने की जिम्मेदारी आप पर आ सकती है।
  • फर्जीवाड़े का खतरा: EC से यह स्पष्ट होता है कि बेचने वाला व्यक्ति ही असल मालिक है, इसके बिना आप किसी ऐसी संपत्ति के जाल में फंस सकते हैं जिसे पहले ही किसी और को बेचा या गिरवी रखा जा चुका हो। 

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होम लोन और दाखिल-खारिज में अड़चन

सिर्फ कानूनी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि वित्तीय कार्यों के लिए भी यह अनिवार्य है, देश का कोई भी बैंक बिना पिछले 15 से 30 साल के EC रिकॉर्ड के होम लोन मंजूर नहीं करता है। साथ ही, सरकारी रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने (Mutation/दाखिल-खारिज) के समय भी इसकी कमी आपके काम को रोक सकती है।

कैसे प्राप्त करें यह दस्तावेज?

डिजिटल इंडिया के दौर में अब EC प्राप्त करना बेहद आसान हो गया है। खरीदार अपने राज्य के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय या संबंधित राजस्व विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे उत्तर प्रदेश के लिए IGRSUP) पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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रजिस्ट्री से पहले केवल स्टाम्प ड्यूटी और कागजी कार्रवाई पर ध्यान न दें, सुनिश्चित करें कि आपके पास प्रॉपर्टी का लेटेस्ट ‘Encumbrance Certificate’ मौजूद है, ताकि आपका आशियाना विवादों से मुक्त रहे। 

Encumbrance Certificate Meaning Importance How to Apply
Author
Divya

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