सरकार ने हाल में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए नए पेंशन और ग्रेच्युटी नियम जारी किए हैं, जो विशेष रूप से कामकाज में लापरवाही या किसी आपराधिक मामले में दोषी पाए गए कर्मचारियों पर लागू होंगे। ये नियम दो साल पहले घोषित किए गए थे, लेकिन दिवाली के बाद इन्हें सख्ती से लागू किया जाएगा। सरकार ने कर्मचारियों का मासिक रिपोर्ट कार्ड तैयार करने का प्रावधान किया है, जिससे उनकी कार्यशैली का आकलन हो सके और सही निर्णय लिया जा सके।

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कौन होंगे प्रभावित?
यह नियम उन कर्मचारियों पर लागू होंगे जिनकी परफॉर्मेंस संतोषजनक नहीं है या जो किसी अपराध में शामिल पाए जाते हैं। जिन कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें होती हैं या वे अपने कर्तव्यों का ठीक से पालन नहीं करते, उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। यह प्रणाली वर्तमान में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए लागू है, लेकिन भविष्य में इसे राज्य सरकारें भी अपना सकती हैं।
रिपोर्ट कार्ड और निगरानी
अब हर माह केंद्र सरकार के कर्मचारियों का रिपोर्ट कार्ड बनेगा जिसमें उनकी कामकाजी योग्यता और किसी भी आचार दोष के बारे में जानकारी शामिल होगी। इस रिपोर्ट के आधार पर विभागाध्यक्ष यह निर्धारित करेंगे कि किस कर्मचारी की पेंशन कितने माह के लिए रोकी जाए। ऐसे आदेश सभी विभागों के अपॉइंटमेंट अथॉरिटीज को लिखित में दिए जा चुके हैं।
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जबरन रिटायरमेंट का नियम
अगर किसी कर्मचारी को जबरन रिटायर किया जाता है तो 10 साल की सेवा पूरी करने के बाद उसे पेंशन का एक हिस्सा मिलेगा, जबकि 10 साल से कम सेवा पूरी करने पर केवल सर्विस ग्रेच्युटी मिलेगी। पेंशन या ग्रेच्युटी की अंतिम राशि संबंधित अधिकारी तय करेगा, जो कि पूरी पेंशन या ग्रेच्युटी का 2/3 से 100% तक हो सकती है।
ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा
केंद्र सरकार ने ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये किया है। यह सीमा केवल उन केंद्रीय कर्मचारियों के लिए लागू है जो सीसीएस (पेंशन) नियम 2021 या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत ग्रेच्युटी प्राप्त करते हैं। इस निर्णय का मकसद कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा को बेहतर बनाना है।
















