
पेंशन (Pension) से जुड़े नियमों को लेकर वर्षों से असमंजस में चल रहे लाखों कर्मचारियों के लिए झारखंड हाई कोर्ट (Jharkhand High Court) का हालिया फैसला बड़ी राहत बनकर आया है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई कर्मचारी समय पर Higher Pension Option नहीं चुन पाया, तब भी उसे ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना (Pension Scheme) से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला विशेष रूप से CPF (Contributory Provident Fund) और GPF (General Provident Fund) के बीच फंसे कर्मचारियों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
कोर्ट का मानना है कि पेंशन कोई सरकारी मेहरबानी नहीं बल्कि कर्मचारी का अधिकार (Right) है, और अगर कोई योजना कर्मचारी के हित में ज्यादा लाभकारी है, तो उसे अपनाने से रोकना न्यायसंगत नहीं हो सकता।
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क्या है Higher Pension Scheme और विवाद की जड़
भारत में लंबे समय तक सरकारी कर्मचारियों के लिए दो प्रमुख व्यवस्थाएं रहीं—
- CPF (Contributory Provident Fund)
- GPF-cum-Pension Scheme (General Provident Fund)
CPF में कर्मचारी को एकमुश्त राशि मिलती है, जबकि GPF के तहत रिटायरमेंट के बाद आजीवन मासिक पेंशन (Monthly Pension) का लाभ मिलता है। समय के साथ यह साफ हो गया कि पेंशन योजना कर्मचारियों के लिए ज्यादा सुरक्षित और लाभदायक है।
लेकिन विवाद तब पैदा हुआ जब कई कर्मचारियों ने तय समय पर यह स्पष्ट ऑप्शन नहीं दिया कि वे CPF में बने रहना चाहते हैं या GPF पेंशन स्कीम अपनाना चाहते हैं। कई विभागों ने इसी तकनीकी आधार पर कर्मचारियों को Higher Pension से वंचित कर दिया।
झारखंड हाई कोर्ट का स्पष्ट रुख
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी कर्मचारी ने निर्धारित समय सीमा में CPF में बने रहने का स्पष्ट विकल्प नहीं दिया है, तो उसे स्वतः ही अधिक लाभकारी GPF पेंशन योजना में माना जाएगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा (Social Security) से जुड़ी योजना में तकनीकी नियमों के आधार पर किसी को वंचित करना भेदभाव (Discrimination) की श्रेणी में आएगा।
पूरा मामला: KVS के रिटायर्ड शिक्षक की लड़ाई
यह केस केंद्रीय विद्यालय संगठन (Kendriya Vidyalaya Sangathan – KVS) के एक रिटायर्ड शिक्षक से जुड़ा है।
- शिक्षक की सेवा अप्रैल 1995 में नियमित (Regular) हुई
- मार्च 2019 में वह रिटायर हुए
- शुरुआती दौर में उन्हें CPF में रखा गया
- बाद में नियमों में बदलाव के बावजूद उनसे दोबारा कोई स्पष्ट ऑप्शन नहीं लिया गया
रिटायरमेंट के बाद जब उन्होंने GPF पेंशन स्कीम के तहत Higher Pension की मांग की, तो विभाग ने यह कहकर मना कर दिया कि उन्होंने समय पर ऑप्शन नहीं चुना।
RTI से खुला बड़ा राज
शिक्षक ने इसके बाद RTI (Right to Information) का सहारा लिया। RTI के जवाब में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि विभाग के रिकॉर्ड में ऐसा कोई दस्तावेज मौजूद ही नहीं है, जिससे यह साबित हो कि कर्मचारी ने CPF में बने रहने की लिखित सहमति दी थी।
यही बिंदु पूरे मामले का टर्निंग पॉइंट बना। कोर्ट ने माना कि जब रिकॉर्ड में कोई ऑप्शन मौजूद नहीं है, तो कर्मचारी को डिफॉल्ट रूप से GPF पेंशन योजना में माना जाना चाहिए।
कोर्ट ने क्यों कहा Higher Pension रोकना गलत
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि:
- अगर कोई योजना कर्मचारी के लिए ज्यादा लाभकारी है, तो उसे अपनाने से रोकना अन्यायपूर्ण है
- सिर्फ समय पर ऑप्शन न देने के आधार पर बेहतर पेंशन से वंचित करना गलत है
- पेंशन को “दया” नहीं बल्कि “अधिकार” माना जाना चाहिए
कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि ऐसे मामलों में सख्त नियमों का पालन करने से कर्मचारियों के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं
Supreme Court के 2022 के फैसले का हवाला
झारखंड हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में Supreme Court के 2022 के एक अहम फैसले का भी उल्लेख किया। उस फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा था कि:
- पेंशन योजना में देरी से बदलाव करने पर भी पूर्ण रोक नहीं लगाई जा सकती
- कर्मचारी के हित सर्वोपरि होने चाहिए
- पेंशन को सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा माना जाना चाहिए
इसी आधार पर झारखंड हाई कोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को सही ठहराया।
इन तीन स्थितियों में पेंशन स्कीम बदलना वैध
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निम्न तीन परिस्थितियों में कर्मचारी को पेंशन योजना बदलने का पूरा अधिकार होगा:
- जब कर्मचारी ने कोई ऑप्शन दिया ही नहीं
- जब कर्मचारी ने तय समय सीमा में ऑप्शन नहीं दिया
- जब कर्मचारी ने पहले CPF चुना लेकिन बाद में ज्यादा फायदेमंद पेंशन योजना की मांग की
इन तीनों ही मामलों में Higher Pension का लाभ रोका नहीं जा सकता।
सरकारी विभाग की याचिका खारिज
इस फैसले को चुनौती देते हुए केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल का आदेश पूरी तरह वैध और न्यायसंगत है, इसमें किसी तरह के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।
कर्मचारियों के लिए क्यों है यह फैसला बेहद अहम
यह निर्णय न सिर्फ KVS बल्कि उन सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए मिसाल बनेगा, जो CPF और GPF पेंशन को लेकर वर्षों से असमंजस में हैं। इससे:
- रिटायर्ड कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी
- रिटायर होने वाले कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित होगा
- लंबित विवादों और मुकदमों में कमी आएगी
















