
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के लिए नियामक संस्था IRDAI के नए नियम दोहरी चुनौती लेकर आए हैं, बीमा नियामक द्वारा सरेंडर वैल्यू के नियमों में किए गए बदलावों के कारण न केवल LIC के भविष्य के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका है, बल्कि शेयर बाजार में आई गिरावट से निवेशकों और पॉलिसीधारकों को भारी वित्तीय चपत लगी है।
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मुनाफे पर ₹11,500 करोड़ का दबाव
बीमा नियामक IRDAI के संशोधित नियमों के अनुसार, अब बीमा कंपनियों को पॉलिसी सरेंडर करने वाले ग्राहकों को पहले की तुलना में अधिक रिफंड या ‘सरेंडर वैल्यू’ देनी होगी, विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस बढ़े हुए भुगतान के बोझ के कारण LIC के Value of New Business (VNB) में करीब ₹11,500 करोड़ की बड़ी गिरावट आ सकती है, सीधे शब्दों में कहें तो, कंपनी का प्रॉफिट मार्जिन अब पहले जैसा नहीं रहेगा।
बाजार में मची खलबली: ₹70,000 करोड़ की संपत्ति साफ
जैसे ही इन नए नियमों और उससे होने वाले संभावित नुकसान की खबर बाजार में फैली, LIC के शेयरों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया शेयर की कीमतों में आई इस गिरावट की वजह से LIC का मार्केट कैपिटलाइजेशन (बाजार पूंजीकरण) देखते ही देखते ₹70,000 करोड़ कम हो गया, यह उन लाखों पॉलिसीधारकों और निवेशकों के लिए बड़ा झटका है, जिनका पैसा LIC की मार्केट वैल्यू से जुड़ा हुआ है।
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ग्राहकों के लिए क्या है इसके मायने?
हालांकि, सिक्के का दूसरा पहलू ग्राहकों के लिए सकारात्मक है। अक्टूबर 2024 से प्रभावी इन नियमों के बाद, यदि कोई पॉलिसीधारक अपनी बीमा पॉलिसी को बीच में ही बंद (सरेंडर) करता है, तो उसे मिलने वाली राशि अब पहले से काफी ज्यादा होगी, सरकार और नियामक का यह कदम ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए उठाया गया है, ताकि उन्हें पॉलिसी से बाहर निकलने पर कम नुकसान हो।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि अल्पकाल में LIC के शेयरों और वित्तीय आंकड़ों पर दबाव बना रह सकता है, कंपनी को अब अपनी नई बिजनेस रणनीति और प्रोडक्ट मिक्स में बदलाव करना होगा ताकि मार्जिन पर पड़ने वाले इस प्रभाव को कम किया जा सके।
















