
जब भारत में कड़ाके की ठंड की बात होती है, तो अक्सर लोगों के जेहन में शिमला, मनाली या गुलमर्ग का नाम आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश में एक ऐसी जगह भी है जहाँ की ठंड हड्डियों को कंपा देने वाली नहीं, बल्कि पत्थर बना देने वाली होती है? हम बात कर रहे हैं लद्दाख के कारगिल जिले में स्थित द्रास (Dras) की, जिसे ‘लद्दाख का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है।
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दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा बसा हुआ स्थान
द्रास केवल भारत का ही नहीं, बल्कि रुस के साइबेरिया (ओय्म्याकोन) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे ठंडा ऐसा स्थान है जहाँ इंसानी आबादी रहती है, समुद्र तल से लगभग 10,800 फीट की ऊँचाई पर स्थित इस छोटे से शहर में सर्दियों के दौरान तापमान का पारा -20°C से -45°C के बीच रहना आम बात है, ऐतिहासिक आंकड़ों की मानें तो यहाँ न्यूनतम तापमान -60°C तक भी दर्ज किया जा चुका है।
सांस लेते ही जम जाती है बर्फ
यहाँ की ठंड का आलम यह है कि बाहर निकलने पर चंद मिनटों में इंसान की पलकों, भौंहों और दाढ़ी पर बर्फ की परत जम जाती है, खुले में रखी कोई भी गीली वस्तु, चाहे वह कपड़े हों या खाने-पीने की चीजें, पत्थर की तरह सख्त हो जाती हैं, स्थानीय लोग सर्दी शुरु होने से पहले ही महीनों का राशन और जलावन (ईंधन) इकट्ठा कर लेते हैं क्योंकि बर्फबारी के कारण महीनों तक यह इलाका बाहरी दुनिया से कटा रहता है।
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द्रास के बारे में कुछ खास बातें
- शीत मरुस्थल: इसे भारत का शीत मरुस्थल (Cold Desert) भी कहा जाता है।
- रणनीतिक महत्व: 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान द्रास एक महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र था, यहाँ का ‘द्रास वॉर मेमोरियल’ पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।
- पर्यटन: यहाँ घूमने का सबसे सही समय मई से सितंबर के बीच होता है, जब तापमान सुखद रहता है और घाटी हरियाली से भर जाती है।
यदि आप भी रोमांच के शौकीन हैं और इस ‘आइस बॉक्स’ का अनुभव करना चाहते हैं, तो लद्दाख पर्यटन (Ladakh Tourism) की आधिकारिक वेबसाइट या IMD के माध्यम से मौसम की ताज़ा जानकारी लेकर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं।
















