
सिंचाई की किल्लत से जूझ रहे किसानों के लिए 2025 में बड़ी खुशखबरी है, केंद्र और राज्य सरकारें जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ‘खेत तालाब योजना’ (Farm Pond Scheme) के तहत भारी सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में मत्स्य पालन और सिंचाई के लिए विशेष श्रेणियों के किसानों को 90% तक की सब्सिडी दी जा रही है।
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किसे और कितनी मिल रही है सब्सिडी?
सरकारी आंकड़ों और विभिन्न राज्यों की 2025 की गाइडलाइन्स के अनुसार:
- मध्य प्रदेश: अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के किसानों को खेत में तालाब बनाने के लिए 90% तक का अनुदान मिल रहा है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹7.5 लाख तक के लोन प्रोजेक्ट्स के लिए है। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए बलराम तालाब योजना के तहत ₹1 लाख तक की सहायता राशि निर्धारित है।
- उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री खेत तालाब योजना के तहत छोटे तालाब (22×20×3 मीटर) के निर्माण पर लागत का 50% (अधिकतम ₹52,500) अनुदान दिया जाता है। बड़े तालाबों के लिए यह राशि ₹1,14,200 तक हो सकती है।
- राजस्थान: यहाँ किसानों को फार्म पॉन्ड बनाने के लिए अधिकतम ₹1.35 लाख की सब्सिडी दी जा रही है। इसके लिए 30 सितंबर 2025 तक आवेदन करने की समयसीमा तय की गई थी।
आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए आपके पास निम्नलिखित कागजात होने अनिवार्य हैं:
- आधार कार्ड (जो बैंक खाते से लिंक हो)
- जमीन के कागजात (खसरा, खतौनी या जमाबंदी की नकल)
- जाति प्रमाण पत्र (90% सब्सिडी जैसी विशेष छूट के लिए)
- बैंक पासबुक (सब्सिडी DBT के जरिए सीधे खाते में आएगी)
- पासपोर्ट साइज फोटो और मोबाइल नंबर।
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आवेदन की पूरी प्रक्रिया (स्टेप-बाय-स्टेप)
- सबसे पहले अपने राज्य के कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट (जैसे यूपी के लिए agridarshan.up.gov.in या राजस्थान के लिए राज किसान पोर्टल) पर जाएं।
- होमपेज पर ‘खेत तालाब योजना’ या ‘अनुदान हेतु आवेदन’ विकल्प पर क्लिक करें।
- व्यक्तिगत जानकारी, आधार नंबर और जमीन का विवरण भरें, ध्यान दें कि यूपी में तालाब के साथ ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- मांगे गए सभी दस्तावेजों को स्कैन करके अपलोड करें।
- आवेदन के बाद कृषि विभाग की टीम खेत का भौतिक सत्यापन (Verification) करेगी, तालाब का निर्माण पूरा होने के बाद अनुदान राशि दो किस्तों में किसान के खाते में भेज दी जाएगी।
मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन भी है, जहाँ किसान सीधे जिला मत्स्य या कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर फॉर्म जमा कर सकते हैं।
















