
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के परिवार के लिए साल 2026 की शुरुआत एक बड़े कानूनी झटके के साथ हुई है चर्चित ‘जमीन के बदले नौकरी’ घोटाले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी 2026 को लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव सहित कुल 41 आरोपियों के खिलाफ आरोप (Charges) तय कर दिए हैं।
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कोर्ट की सख्त टिप्पणी: ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ की तरह किया काम
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले की सुनवाई करते हुए लालू परिवार पर तीखी टिप्पणी की, अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह परिवार एक ‘क्रिमिनल एंटरप्राइज’ (आपराधिक संगठन) की तरह काम कर रहा था, कोर्ट के अनुसार, लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए अपने पद का दुरुपयोग किया और रेलवे को अपनी ‘निजी जागीर’ की तरह इस्तेमाल किया, जहां सरकारी नौकरियों को जमीन हड़पने के लिए ‘बार्गेनिंग चिप’ बनाया गया।
आर्टिकल की मुख्य बातें
- कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजस्वी और तेज प्रताप यादव सहित 41 लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत मुकदमा चलाने का आदेश दिया है।
- इसी मामले में अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में 52 अन्य आरोपियों को आरोपमुक्त (Discharge) कर दिया है।
- जांच एजेंसियों (CBI और ED) के अनुसार, पटना और आसपास की कीमती जमीनें, जिनकी कीमत करीब 4.39 करोड़ रुपये थी, उन्हें मात्र 26-39 लाख रुपये में लालू परिवार के नाम ट्रांसफर कराया गया था।
- औपचारिक रुप से चार्ज फ्रेम करने की प्रक्रिया के लिए अगली सुनवाई 23 जनवरी 2026 को होगी, जबकि ट्रायल की विस्तृत कार्यवाही 29 जनवरी 2026 से शुरु होगी।
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क्या है मामला?
यह घोटाला 2004 से 2009 के बीच का है जब लालू यादव केंद्रीय रेल मंत्री थे, आरोप है कि रेलवे के ‘ग्रुप-डी’ पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से उनके या उनके रिश्तेदारों के नाम पर जमीनें लिखवाई गई थीं, कोर्ट ने लालू परिवार की डिस्चार्ज याचिकाओं को “अनुचित” बताते हुए खारिज कर दिया और अब उन्हें नियमित ट्रायल का सामना करना होगा।
















