
अगर आप सोचते हैं कि बाइक या कार चलाना आ जाने भर से ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाएगा, तो अब आपको अपनी सोच बदलनी होगी। सड़क परिवहन मंत्रालय की नई गाइडलाइन के मुताबिक अब परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस (Permanent DL) केवल उन्हीं आवेदकों को मिलेगा जो ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर के ट्रैक पर टेस्ट पास कर सकेंगे।
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ऑटोमेटिक ट्रैक से घटेगी गलती की गुंजाइश
नई व्यवस्था में मैनुअल टेस्ट की जगह अब अत्याधुनिक “ऑटोमेटिक ड्राइविंग ट्रैक” की स्थापना की गई है। यहां पूरे टेस्ट को सेंसर और हाई-डेफिनिशन कैमरों की निगरानी में पूरा किया जाएगा। यानी इंसानी गलती या पक्षपात की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।
इस ट्रैक को “8” (Eight) की आकृति में डिजाइन किया गया है, ताकि वाहन चालक को मोड़, ढलान, रिवर्सिंग और पैरलल पार्किंग जैसे सभी जरूरी कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिले। दोपहिया और चारपहिया वाहनों के लिए अलग-अलग ट्रैक तैयार किए गए हैं।
कितनी देर में पार करना होगा ट्रैक?
आवेदक को ट्रैक पूरा करने के लिए तय समय सीमा में वाहन चलाना होगा। दोपहिया और चारपहिया दोनों के लिए कुल 3 मिनट 25 सेकंड का समय निर्धारित किया गया है। यदि कहीं चूक हुई तो सेंसर तुरंत “बीप” करेगा और कैमरा उस गलती को रिकॉर्ड कर लेगा। एक भी गलती पकड़ में आ गई तो ड्राइविंग टेस्ट अपने आप असफल घोषित हो जाएगा।
कार और ट्रक ड्राइवरों के लिए कठिन टेस्ट
चारपहिया वाहनों के लिए पैरलल पार्किंग, चढ़ाई (Gradient) और रिवर्स ड्राइविंग के लिए 45-45 सेकंड का समय दिया गया है। जबकि ट्रक ड्राइवरों को इससे भी कठिन स्तर का टेस्ट देना होगा। उनके लिए पैरलल पार्किंग का समय 60 सेकंड, ग्रेडिएंट 45 सेकंड और रिवर्स 75 सेकंड तय किया गया है। इस दौरान सेंसर हर मूवमेंट ट्रैक करता है और ट्रैक की हर गतिविधि कैमरे में कैद होती है। टेस्ट पास करने के लिए आपको पूरे ट्रैक को तीन से चार मिनट में बिना गलती पार करना होगा।
सिम्युलेटर पर भी सीखनी होगी ड्राइविंग
सिर्फ गाड़ी चलाना ही काफी नहीं है। कार या ट्रक के ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदकों को पहले सिम्युलेटर पर 5 मिनट की ट्रेनिंग दी जाएगी। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे आप कंप्यूटर या मोबाइल पर कार गेम खेलते हैं। सिम्युलेटर पर यह सिखाया जाता है कि कैसे सीमित स्पीड में वाहन चलाकर ट्रैफिक रूल्स का पालन किया जाता है। अगर आप यह चरण सफलतापूर्वक पार कर लेते हैं, तभी आपको असली ट्रैक पर जाने की अनुमति मिलती है।
बुकिंग और टेस्ट की नई व्यवस्था
अब से परमानेंट डीएल (Permanent DL) के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुक कराने वालों को पहले ट्रांसपोर्ट नगर या देवा रोड एआरटीओ ऑफिस जाना होगा। वहां आवेदन पत्र की स्क्रूटनी और बायोमीट्रिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद आवेदक को लखनऊ के उदेत खेड़ा मौंदा स्थित Automatic Driving Training Centre पहुंचना होगा, जो ट्रांसपोर्ट नगर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। ट्रैक पर पहुंचने के बाद टोकन काउंटर से प्रक्रिया शुरू होगी, जहां आवेदक की फोटो और हस्ताक्षर लिए जाएंगे।
पुराने सिस्टम को अलविदा
अब तक लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर और देवा रोड में ड्राइविंग टेस्ट मैनुअल तरीके से लिया जाता था। इसमें कई बार नियमों की अनदेखी और “जुगाड़” की शिकायतें मिलती थीं। नई ऑटोमेटिक ट्रैक प्रणाली इस मनमानी को खत्म कर पारदर्शिता लाने की दिशा में बड़ा कदम है।
एआरटीओ प्रशासन के अनुसार, ट्रैक टेस्ट के लिए कोई अतिरिक्त फीस नहीं ली जाएगी। हालांकि, ड्राइविंग ट्रेनिंग कोर्स करने के इच्छुक आवेदक तय शुल्क देकर केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं। यह कोर्स रोड सिंबल, ट्रैफिक साइन और सेफ ड्राइविंग की समझ बढ़ाने में मदद करेगा।
पर्यावरण के लिए हरियाली की मिसाल
वाहन परीक्षण के दौरान उत्सर्जन और धूल से प्रदूषण बढ़ने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए पूरे परिसर में कोनोकार्पस (Conocarpus) नाम के तेजी से बढ़ने वाले सदाबहार पेड़ लगाए गए हैं। यह पौधे हवा से धूल और प्रदूषक कणों को सोखकर वातावरण को शुद्ध करते हैं।
नए साल से लागू होगी नई व्यवस्था
नया साल राजधानी लखनऊ सहित देशभर के अन्य शहरों के ड्राइवरों के लिए नया अध्याय लेकर आएगा। अब परमानेंट डीएल पाने के लिए केवल वाहन चलाना नहीं, बल्कि ट्रैफिक नियमों का पालन और सही ड्राइविंग स्किल दिखाना भी जरूरी होगा। यह कदम सड़क सुरक्षा को मजबूत करेगा और देश में “स्मार्ट ड्राइवर” तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
















