
मशरूम को लेकर अक्सर शाकाहारियों और मांसाहारियों के बीच लंबी बहस छिड़ जाती है, कई लोग इसके ‘मीटी’ टेक्सचर (मांस जैसा स्वाद) की वजह से इसे नॉन-वेज की श्रेणी में रखते हैं, लेकिन 2026 में भी विज्ञान ने इस पर अपनी स्थिति साफ रखी है।
Table of Contents
न पौधा, न जानवर: यह है ‘तीसरा जगत’
वैज्ञानिक वर्गीकरण (Biological Classification) के अनुसार, मशरूम न तो पौधों (Plantae) की श्रेणी में आता है और न ही जानवरों (Animalia) की, यह ‘फंजाई’ (Fungi) किंगडम का हिस्सा है, पौधों के विपरीत, मशरूम में क्लोरोफिल नहीं होता और वे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) के जरिए अपना भोजन नहीं बनाते, बल्कि मृत कार्बनिक पदार्थों पर निर्भर रहते हैं।
विज्ञान इसे क्यों मानता है ‘वेज’?
विज्ञान मशरूम को पूरी तरह शाकाहारी मानता है क्योंकि:
- मांस का अभाव: इसमें जानवरों की तरह कोई मांस, नसें, रक्त संचार या केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (Central Nervous System) नहीं होता।
- जीव हत्या नहीं: इसे तोड़ने या काटने पर किसी जीव की हत्या नहीं होती, जैसा कि जानवरों के मामले में होता है।
- पोषक तत्व: मशरूम विटामिन-D, सेलेनियम और पोटैशियम का बेहतरीन स्रोत है, जो इसे सब्जियों की तरह एक हेल्दी डाइट बनाता है।
यह भी देखें: School Holiday News: कई राज्यों में 4 दिन तक स्कूल बंद, छुट्टियों की पूरी लिस्ट यहां देखें
‘मीटी’ स्वाद का राज: उमामी (Umami)
मशरुम में प्राकृतिक रूप से ‘उमामी’ स्वाद पाया जाता है, जो अक्सर मांस में मिलता है, यही कारण है कि इसे कई बार ‘वेजिटेबल मीट’ भी कहा जाता है, जिससे लोगों में इसके मांसाहारी होने का भ्रम पैदा होता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण
जहाँ विज्ञान इसे शाकाहारी मानता है, वहीं कुछ धर्मों और आयुर्वेद में इसे ‘तामसिक’ (Tamasic) श्रेणी में रखा गया है, कुछ समुदायों में इसके उगने के तरीके (गंदगी या मृत पदार्थों पर) के कारण इसे ‘अशुद्ध’ मानकर खाने से परहेज किया जाता है।
यदि आप तकनीकी और वैज्ञानिक आधार पर अपनी डाइट तय करते हैं, तो मशरूम पूरी तरह से शाकाहारी और वीगन-फ्रेंडली है।
















