
दिल्ली-एनसीआर में यातायात की बढ़ती भीड़ को कम करने और नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (जेवर) तक सुगम संपर्क प्रदान करने के उद्देश्य से, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच एक नया, लगभग 30 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे प्रस्तावित किया गया है, नोएडा प्राधिकरण ने इस परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, हालांकि सिंचाई विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) न मिलने के कारण योजना फिलहाल लंबित है।
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परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- मार्ग: यह प्रस्तावित एक्सप्रेसवे यमुना नदी के किनारे (यमुना पुश्ता रोड) के साथ-साथ चलेगा।
- कनेक्टिविटी: यह ओखला बैराज (कालिंदी कुंज के पास) से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर समाप्त होगा, जिससे जेवर हवाई अड्डे तक सीधी और तेज़ कनेक्टिविटी मिलेगी।
- प्रकार: दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है: या तो जमीन पर आठ लेन का एक्सप्रेसवे या छह लेन का एलिवेटेड रोड।
- अनुमानित लागत: इस परियोजना पर करीब ₹4000 करोड़ की लागत आने का अनुमान है।
- स्थिति: नोएडा अथॉरिटी ने इस परियोजना के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का निर्णय लिया है। प्राधिकरण ने NHAI (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) से भी अनुरोध किया है कि वह इस परियोजना को अपने हाथ में ले, ताकि फंडिंग और निष्पादन में आसानी हो।
संभावित लाभ
- ट्रैफिक से राहत: यह नया मार्ग मौजूदा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के लिए एक बैकअप कॉरिडोर के रूप में काम करेगा, जिससे पीक आवर्स में लगने वाले भीषण जाम से दैनिक यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
- समय की बचत: यह दिल्ली, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा के समय को काफी कम कर देगा, खासकर जेवर हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद।
- बुनियादी ढांचे का विकास: बेहतर संपर्क क्षेत्र में रियल एस्टेट और वाणिज्यिक विकास को बढ़ावा देगा।
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सिंचाई विभाग ने इस आधार पर NOC देने से इनकार कर दिया है कि यमुना तटबंध के पास निर्माण से ड्रेनेज चैनल और तटबंध प्रभावित हो सकते हैं, इस कारण, नोएडा अथॉरिटी फिलहाल मौजूदा 45 मीटर चौड़ी सेक्टर रोड के अधूरे हिस्सों को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, ताकि इसे अंतरिम रूप से मुख्य एक्सप्रेसवे के सहायक कॉरिडोर के रूप में इस्तेमाल किया जा सके।
















