
हमारे समाज ने तकनीक, शिक्षा और रोजगार में काफी तरक्की कर ली है, लेकिन जब बात शादी की आती है तो आज भी सोच में कई दीवारें खड़ी हैं। खासकर जाति के नाम पर बने भेदभाव के चलते, कई बार दो समझदार और बालिग लोग, जो एक-दूसरे से प्यार करते हैं, साथ नहीं रह पाते। राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों में यह समस्या और गहरी है, जहां परिवार और समाज आज भी “अपनी जाति” में शादी करने का दबाव डालते हैं। ऐसी सोच को बदलने और समानता का संदेश देने के लिए राजस्थान सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है डॉ. सविता बेन आंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना।
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क्या है डॉ. सविता बेन आंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना?
इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज में जाति आधारित पूर्वाग्रहों को खत्म करना और युवाओं को बिना भेदभाव के जीवन साथी चुनने का अधिकार देना है। योजना के तहत अगर अनुसूचित जाति (SC) का कोई व्यक्ति किसी अन्य सामान्य श्रेणी के व्यक्ति से शादी करता है, तो सरकार ऐसे जोड़ों को आर्थिक सहायता देती है ताकि वे वित्तीय परेशानी की चिंता किए बिना अपना नया जीवन शुरू कर सकें।
कौन उठा सकता है इस योजना का लाभ?
इस योजना में कुछ मुख्य शर्तें तय की गई हैं ताकि इसका लाभ उन्हीं को मिले जो सच में जरूरतमंद हैं।
- दंपति में से एक व्यक्ति अनुसूचित जाति से और दूसरा सामान्य श्रेणी से होना चाहिए।
- दोनों राजस्थान राज्य के स्थायी निवासी हों।
- महिला की उम्र कम से कम 18 वर्ष और पुरुष की 21 वर्ष होनी चाहिए, जबकि दोनों की उम्र 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- पारिवारिक वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
- किसी भी प्रकार का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और यह शादी पूरी सहमति से हुई होनी चाहिए।
- यह योजना केवल पहली शादी पर लागू होती है, यानी पुनर्विवाह की स्थिति में इसका लाभ नहीं दिया जाता।
कितनी और कैसे मिलती है आर्थिक मदद?
राजस्थान सरकार इस योजना के अंतर्गत 10 लाख रुपये की सहायता राशि देती है। यह राशि दो भागों में बांटी जाती है।
- 5 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराई जाती है, जो 8 वर्षों तक लॉक रहती है।
- बाकी 5 लाख रुपये सीधे पति-पत्नी के संयुक्त बैंक खाते में भेजे जाते हैं, ताकि तुरंत आर्थिक सहयोग मिल सके।
यह मॉडल न केवल वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखता है, बल्कि भविष्य के लिए भी आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है।
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदनकर्ता को कुछ जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं:
- वैवाहिक पंजीकरण प्रमाणपत्र
- जाति प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र
- जन्म प्रमाणपत्र या 10वीं कक्षा की मार्कशीट
- आधार कार्ड, पैन कार्ड और भामाशाह कार्ड
- दोनों का संयुक्त बैंक अकाउंट पासबुक
- आय प्रमाणपत्र
- शादी की फोटो
- यदि पहले विवाह हुआ हो तो पूर्व जीवनसाथी का मृत्यु प्रमाणपत्र
- स्टैंप पेपर पर लिखा हुआ स्वयं-घोषणा पत्र
आवेदन की प्रक्रिया
इस योजना के लिए आवेदन शादी के एक महीने के अंदर करना अनिवार्य है। आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है:
- सबसे पहले sso.rajasthan.gov.in वेबसाइट पर लॉगिन करें।
- इसके बाद Citizen Section में जाकर SJMS Application लिंक पर क्लिक करें।
- खुलने वाले फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी भरें।
- जरूरी दस्तावेज़ अपलोड करें और फ़ॉर्म सबमिट करें।
योजना से जुड़ी विस्तृत जानकारी और आवश्यक अपडेट myscheme.gov.in पोर्टल पर भी उपलब्ध हैं।
सामाजिक बदलाव की दिशा में बड़ा कदम
राजस्थान सरकार की यह योजना सिर्फ आर्थिक मदद भर नहीं है, बल्कि समाज में बराबरी, सम्मान और आज़ादी का वास्तविक संदेश देती है। यह उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने रिश्तों में जात-पात की दीवारों को पार करना चाहते हैं। अगर इस तरह की पहलें और राज्यों में भी लागू की जाएं, तो आने वाले समय में “ऑनर किलिंग” जैसे शब्द शायद सिर्फ इतिहास की किताबों तक सीमित रह जाएंगे।
















