
वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में देवी-देवताओं और पितरों (पूर्वजों) की तस्वीरें लगाने के कुछ विशेष नियम हैं, इनका पालन न करने पर घर में नकारात्मक ऊर्जा और पितृ दोष उत्पन्न हो सकता है, जिससे परिवार की शांति भंग हो सकती है।
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पितरों की तस्वीर लगाने के नियम
पूर्वजों को देवताओं के समान पूजनीय माना जाता है, लेकिन उनकी तस्वीरें लगाने के लिए वास्तु में सख्त निर्देश दिए गए हैं:
- सही दिशा: पितरों की तस्वीर हमेशा घर की उत्तर दिशा की दीवार पर लगानी चाहिए, ताकि उनका मुख दक्षिण दिशा की ओर रहे। दक्षिण को पितरों की दिशा माना जाता है।
- इन जगहों पर न लगाएं:
- पूजा घर: पितरों की तस्वीरों को कभी भी देवी-देवताओं के साथ या मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से ‘देव दोष’ लग सकता है।
- बेडरूम और किचन: शयनकक्ष (बेडरूम) या रसोई (किचन) में पूर्वजों की फोटो लगाना वर्जित है। इससे पारिवारिक कलह और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
- जीवित लोगों के साथ: पितरों की तस्वीर को कभी भी जीवित सदस्यों की तस्वीरों के साथ नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि इसका जीवित व्यक्तियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- सफाई का रखें ध्यान: तस्वीरों पर कभी भी धूल-मिट्टी या जाले नहीं लगने चाहिए, अन्यथा राहु का दोष लग सकता है और पितर रुष्ट हो सकते हैं।
देवी-देवताओं की तस्वीर के नियम
- ईशान कोण और दिशा: पूजा का मंदिर अधिमानतः घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होना चाहिए। भगवान का मुख पश्चिम की ओर होना शुभ माना जाता है ताकि पूजा करते समय भक्त का मुख पूर्व की ओर रहे।
- तस्वीरों का चयन: घर में हमेशा देवी-देवताओं की शांत और सौम्य मुद्रा वाली तस्वीरें लगानी चाहिए। हिंसक या क्रोधित अवस्था वाली मूर्तियों या चित्रों से घर में तनाव बढ़ सकता है।
- वर्जित दिशा: भगवान की फोटो को गलत दिशा में लगाने से घर में कंगाली और दुख आ सकते हैं।
इन नियमों की अनदेखी करने से घर में आर्थिक तंगी, मानसिक अशांति और कार्य में बाधाएं उत्पन्न होने की संभावना रहती है।
















