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Property Rights: क्या अंतरजातीय विवाह पर पिता छीन सकता है बेटी का हक? सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत और जायदाद पर सुनाया बड़ा फैसला

भारत में संपत्ति के अधिकारों को लेकर समय-समय पर ऐतिहासिक फैसले आते रहे हैं, अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कोई पिता अपनी बेटी को सिर्फ इसलिए संपत्ति से बेदखल कर सकता है क्योंकि उसने अपनी पसंद से अंतरजातीय विवाह (Inter-caste Marriage) किया है? 2025 में अदालतों ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है

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Property Rights: क्या अंतरजातीय विवाह पर पिता छीन सकता है बेटी का हक? सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत और जायदाद पर सुनाया बड़ा फैसला
Property Rights: क्या अंतरजातीय विवाह पर पिता छीन सकता है बेटी का हक? सुप्रीम कोर्ट ने वसीयत और जायदाद पर सुनाया बड़ा फैसला

 भारत में संपत्ति के अधिकारों को लेकर समय-समय पर ऐतिहासिक फैसले आते रहे हैं, अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कोई पिता अपनी बेटी को सिर्फ इसलिए संपत्ति से बेदखल कर सकता है क्योंकि उसने अपनी पसंद से अंतरजातीय विवाह (Inter-caste Marriage) किया है? 2025 में अदालतों ने इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

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अंतरजातीय विवाह से नहीं खत्म होता संपत्ति पर हक

कानूनी विशेषज्ञों और हालिया अदालती फैसलों के अनुसार, किसी भी बेटी का अपनी पैतृक संपत्ति पर अधिकार उसकी शादी या उसके जीवनसाथी की जाति से प्रभावित नहीं होता है।

  • गुजरात हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (HSA) की धारा 26 के तहत, बेटी का जन्मसिद्ध अधिकार अंतरजातीय विवाह से समाप्त नहीं होता।
  • अदालत ने जोर देकर कहा कि “जाति कोई मायने नहीं रखती” और परिवार से दूरी भी हक नहीं छीन सकती। जब तक बेटी लिखित में अपना हक नहीं छोड़ती, वह संपत्ति की बराबर की वारिस बनी रहती है।

पैतृक संपत्ति (Ancestral Property) पर सुप्रीम कोर्ट का रुख

सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न फैसलों (जैसे विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा) में यह तय कर दिया है कि बेटी जन्म से ही सह-वारिस (Coparcener) होती है।

  • जन्मसिद्ध अधिकार: बेटी का पैतृक संपत्ति पर उतना ही हक है जितना बेटे का यह अधिकार उसे जन्म से मिलता है।
  • शादी के बाद भी हक: शादीशुदा होने या अंतरजातीय विवाह करने से यह संवैधानिक और कानूनी अधिकार नहीं छिनता।

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स्व-अर्जित संपत्ति (Self-Acquired Property) का क्या है नियम?

यहाँ पिता के पास कुछ विशेष अधिकार होते हैं:

  • वसीयत का महत्व: यदि संपत्ति पिता ने खुद की कमाई से खरीदी है, तो वह इसे अपनी मर्जी से किसी को भी वसीयत कर सकता है।
  • बिना वसीयत मृत्यु: यदि पिता की मृत्यु बिना वसीयत (Intestate) किए हो जाती है, तो 2025 के नवीनतम फैसलों के अनुसार, बेटी का स्व-अर्जित संपत्ति पर भी बेटों के बराबर ही हक होगा।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2025 के एक फैसले (अंगादि चंद्रन्ना बनाम शंकर) में यह भी स्पष्ट किया कि पिता की निजी संपत्ति को केवल बच्चों के होने मात्र से संयुक्त परिवार की संपत्ति नहीं माना जा सकता, जब तक कि वह खुद उसे साझा न करे।

भेदभाव कानूनी रूप से मान्य नहीं

अदालतों ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुच्छेद 15(1) के तहत धर्म, मूलवंश, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता, यदि कोई पिता केवल अंतरजातीय विवाह के आधार पर बेटी को हक देने से मना करता है, तो बेटी अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है और अपना कानूनी हिस्सा प्राप्त कर सकती है।

Property Rights
Author
Divya

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