भारतीय सेना ने जनवरी 2025 में तीन-परत वाली डिजिटल प्रिंट यूनिफॉर्म पेश की, जिसे नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), दिल्ली के सहयोग से आर्मी डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है। यह यूनिफॉर्म विशेष रूप से सैनिकों को हर मौसम और जगह में बेहतर छद्मावरण और आराम प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है।

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पेटेंट सुरक्षा और कानूनी संरक्षण
भारतीय सेना ने इस नए कोट कॉम्बैट के डिज़ाइन और कैमोफ्लाज पैटर्न का कानूनी अधिकार 27 फरवरी 2025 को कोलकाता के कंट्रोलर जनरल ऑफ पेटेंट्स, डिजाइंस एंड ट्रेडमार्क्स कार्यालय में दर्ज कराया। इसे अक्टूबर 2025 में आधिकारिक पेटेंट जर्नल में प्रकाशित किया गया। इसके बाद किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना सेना की अनुमति इस डिज़ाइन का उपयोग, निर्माण या बिक्री करने की अनुमति नहीं है। इस प्रकार की किसी भी गलत हरकत पर गंभीर कानूनी कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाएगा।
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कोट कॉम्बैट की प्रमुख विशेषताएं
- तीन परतें: यह यूनिफॉर्म एक बाहरी डिजिटल प्रिंट परत, एक हल्की इंसुलेटेड मिड-लेयर जैकेट और एक थर्मल लेयर से मिलकर बना है।
- आउटर लेयर: कैमोफ्लाज डिज़ाइन वाला टिकाऊ कपड़ा जो जंगल, रेगिस्तान और पहाड़ी इलाकों में छुपने में मददगार है।
- मिड-लेयर जैकेट: सांस लेने योग्य और गर्माहट प्रदान करने वाला हल्का कपड़ा।
- थर्मल लेयर: शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है और पसीना सोखता है, जिससे भारी ठंड या गर्मी में आराम मिलता है।
स्वदेशीकरण और सैनिक कल्याण की दिशा में बड़ा कदम
इस कदम से भारतीय सेना न केवल अपनी सैनिक वर्दी की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है, बल्कि नकली वर्दी की समस्या को भी खत्म कर रही है। इससे सैनिकों को बेहतर और विश्वसनीय यूनिफॉर्म मिलेगा, जो उनकी कार्यक्षमता और सुरक्षा दोनों को बढ़ाएगा। यह पहल आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने और सेना के आधुनिकीकरण में सहायक है।
















