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Amazing Fact: ट्रेन का बिजली बिल एक दिन में कितना आता है? Cost जानकर दंग रह जाएंगे, जानें पूरी कैलकुलेशन

भारतीय रेलवे रोजाना हजारों ट्रेनों को दौड़ाने के लिए करोड़ों यूनिट बिजली खर्च करता है। लेकिन क्या आप जानते हैं एक ट्रेन का सिर्फ एक दिन का बिजली बिल कितना आता है? जवाब जानकर आपके होश उड़ जाएंगे।

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Amazing Fact: ट्रेन का बिजली बिल एक दिन में कितना आता है? Cost जानकर दंग रह जाएंगे, जानें पूरी कैलकुलेशन
Amazing Fact: ट्रेन का बिजली बिल एक दिन में कितना आता है? Cost जानकर दंग रह जाएंगे, जानें पूरी कैलकुलेशन

भारत में ट्रेनें सिर्फ एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि हर आम भारतीय की जीवनरेखा हैं। लाखों यात्री रोजाना रेल के जरिए एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा करते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि इतनी बड़ी ट्रेन को चलाने और यात्रियों को सभी सुविधाएं देने में कितना बिजली खर्च होता है? एक दिन में ट्रेन का बिजली बिल जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे।

भारतीय रेलवे में बिजली की जरूरत कहां-कहां होती है

एक ट्रेन में बिजली सिर्फ इंजन चलाने के लिए नहीं लगती, बल्कि कई जगहों पर इसकी खपत होती है। मुख्य रूप से रेल के बिजली उपयोग को तीन हिस्सों में बांटा जा सकता है-

  1. ट्रैक्शन पावर: यानी रेल इंजन को चलाने के लिए लगने वाली बिजली।
  2. नॉन-ट्रैक्शन पावर: ट्रेन के अंदर यानी एसी, पंखा, लाइट, चार्जिंग पॉइंट, पैंट्री आदि के संचालन में इस्तेमाल होने वाली बिजली।
  3. स्टैंडिंग लोड: जब ट्रेन स्टेशन पर खड़ी होती है, तब भी कुछ सिस्टम जैसे कूलिंग या सुरक्षा उपकरण चलते रहते हैं, जिनमें भी बिजली लगती है।

एसी कोच की बिजली खपत

एसी कोच ट्रेन के बाकी डिब्बों की तुलना में सबसे ज्यादा बिजली खपत करता है। एक अनुमान के अनुसार, एक एसी कोच हर घंटे करीब 210 यूनिट बिजली उपयोग करता है। अगर ट्रेन 12 घंटे की यात्रा करती है, तो केवल एक एसी कोच का बिजली खर्च लगभग 1,7640 रुपये तक पहुंच जाता है (मान लीजिए बिजली दर 7 रुपये प्रति यूनिट है)। अगर किसी ट्रेन में 10 एसी कोच हैं, तो केवल एसी व्यवस्था पर होने वाला खर्च दिनभर में लाख रुपये से ज्यादा हो सकता है।

स्लीपर और जनरल कोच की खपत

स्लीपर और जनरल कोचों में बिजली का उपयोग थोड़ा कम होता है, क्योंकि इनमें एसी सिस्टम नहीं होते। यहां एक घंटे में करीब 120 यूनिट बिजली खर्च होती है। 12 घंटे की यात्रा के लिए यह आंकड़ा लगभग 10,080 रुपये तक जा सकता है। जब ये कोच बड़ी संख्या में हों, तो कुल बिजली खर्च काफी बढ़ जाता है।

इंजन और पावर सप्लाई के दो प्रमुख तरीके

भारतीय रेलवे ट्रेन को बिजली दो तरीकों से मुहैया कराता है—

  1. हाईटेंशन वायर डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम: इलेक्ट्रिक इंजन ट्रैक के ऊपर लटके हाई-वोल्टेज तारों (25,000 वोल्ट एसी सप्लाई) से सीधे बिजली लेता है।
  2. पावर जनरेटर कोच सिस्टम: कुछ ट्रेनों में डीजल आधारित पावर कारें लगी होती हैं, जो पूरे ट्रेन के लिए बिजली पैदा करती हैं। हालांकि, धीरे-धीरे रेलवे इन्हें ऊर्जा-कुशल हेड-ऑन जनरेशन (HOG) तकनीक से बदल रहा है।

भारतीय रेलवे की कुल बिजली खपत

भारतीय रेलवे देश का सबसे बड़ा बिजली उपभोक्ता संस्थान है। रेलवे प्रतिवर्ष लगभग 20 अरब यूनिट बिजली का उपभोग करता है। अनुमान के अनुसार, एक लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेन का कुल दैनिक बिजली खर्च बिजली की दर, कोचों की संख्या, यात्रियों की सुविधा और दूरी के हिसाब से 1 लाख से 2 लाख रुपये के बीच आ सकता है।

ऊर्जा दक्षता और नई पहलें

पिछले कुछ वर्षों में भारतीय रेलवे ने ऊर्जा बचत की दिशा में कई कदम उठाए हैं-

  • सोलर पैनल कोच: कुछ ट्रेनों में छत पर सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे आंतरिक लाइटिंग सिस्टम चलता है।
  • HOG टेक्नोलॉजी: नई तकनीक से इंजन ही पूरे कोच को बिजली सप्लाई करता है, जिससे डीजल जनरेटर को हटाया जा रहा है।
  • LED लाइटिंग और स्मार्ट पावर मैनेजमेंट सिस्टम: इससे पुराने सिस्टम की तुलना में बिजली खपत में 20-30 प्रतिशत तक की बचत हुई है।
Amazing Fact
Author
Divya

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