
भारतीय बैंकिंग सेक्टर में इन दिनों एक दिलचस्प ट्रेंड देखा जा रहा है, आम आदमी अब अपने बचत खाते में निष्क्रिय पड़े पैसे को रखने के बजाय उसे फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में लॉक करना अधिक समझदारी मान रहा है, वित्तीय जानकारों और हालिया बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बचत खातों से धन की निकासी और FD में निवेश बढ़ने के कई प्रमुख कारण हैं।
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आकर्षक ब्याज दरें और बढ़ता अंतर
सेविंग्स अकाउंट में आमतौर पर 3% से 4% तक का ब्याज मिलता है, जो मुद्रास्फीति (महंगाई) के सामने बहुत कम है, इसके विपरीत, 2025 में प्रमुख बैंक और स्मॉल फाइनेंस बैंक FD पर 5.5% से लेकर 8.5% तक का आकर्षक ब्याज दे रहे हैं। ब्याज दरों का यह बड़ा अंतर ग्राहकों को अपना पैसा शिफ्ट करने के लिए मजबूर कर रहा है।
बजट 2025 में मिली टैक्स राहत
केंद्रीय बजट 2025 ने FD को और भी लुभावना बना दिया है। सरकार ने FD पर मिलने वाले ब्याज पर TDS (Tax Deducted at Source) की सीमा बढ़ा दी है। अब सामान्य नागरिकों के लिए यह सीमा ₹40,000 से बढ़ाकर ₹50,000 और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है। इससे अब कम आय वाले निवेशकों को अपनी जमा राशि पर टैक्स कटौती की चिंता नहीं सताती।
बैंकों के बीच ‘डिपॉजिट वॉर’
लोन (कर्ज) की बढ़ती मांग और मार्केट में नकदी की कमी (Liquidity Crunch) के कारण बैंकों पर डिपॉजिट बढ़ाने का भारी दबाव है। इसे पूरा करने के लिए बैंक न केवल पुरानी FD दरों को ऊंचा रख रहे हैं, बल्कि ‘स्पेशल डेज FD’ जैसी आकर्षक स्कीमें भी लॉन्च कर रहे हैं। यहां तक कि RBI द्वारा रेपो रेट में कटौती के बावजूद, बैंक अपनी FD दरें घटाने से कतरा रहे हैं ताकि ग्राहक उनके पास बने रहें।
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए ‘गोल्डन पीरियड’
2025 में वरिष्ठ नागरिकों को सामान्य दरों के मुकाबले 0.50% से 0.75% अधिक ब्याज मिल रहा है। कई बैंक 80 वर्ष से अधिक उम्र के ‘सुपर सीनियर सिटीजंस’ के लिए विशेष दरें ऑफर कर रहे हैं, जो सुरक्षित रिटर्न चाहने वाले इस वर्ग के लिए आय का एक शानदार जरिया बन गया है।
सुरक्षा और निश्चित रिटर्न का भरोसा
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में उतार-चढ़ाव के बीच, भारतीय मध्यम वर्ग आज भी गारंटीड रिटर्न को प्राथमिकता दे रहा है। FD में निवेश के समय ही मैच्योरिटी राशि तय हो जाती है, जो निवेशकों को मानसिक शांति और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है, साथ ही, DICGC के तहत ₹5 लाख तक की जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित होती है।
डिजिटल बैंकिंग और ‘स्वीप-इन’ सुविधा
अब ग्राहकों को FD कराने के लिए बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ते, मोबाइल ऐप के जरिए सेकंडों में FD खुल जाती है, साथ ही, ‘ऑटो-स्वीप’ (Auto-Sweep) जैसी सुविधाओं ने काम आसान कर दिया है, इसमें बचत खाते में एक तय सीमा से अधिक पैसा होने पर वह अपने आप FD में बदल जाता है, जिससे ग्राहकों को बिना मेहनत किए ऊंचे ब्याज का लाभ मिलता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बैंकों को अपनी क्रेडिट मांग पूरी करने के लिए कैश की जरुरत रहेगी, तब तक FD की दरें ऊंची बनी रहेंगी ऐसे में बचत खाते से पैसा निकालकर FD में डालना 2025 के निवेशकों के लिए एक स्मार्ट विकल्प साबित हो रहा है।
















