
उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना, जो मेरठ को प्रयागराज से जोड़ती है, भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक बड़े विवाद में फंस गई है, हालांकि मुख्य एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य निर्धारित गति से जारी है, लेकिन कुछ जिलों, विशेषकर फर्रुखाबाद में, किसानों द्वारा मुआवजे की दरों में असमानता को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन के कारण स्थानीय स्तर पर काम प्रभावित हुआ है।
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मुआवजा वितरण में असमानता मुख्य मुद्दा
किसानों की मुख्य शिकायत यह है कि उन्हें लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की जा रही भूमि के बदले मुख्य एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत अन्य जिलों के किसानों को दिए गए मुआवजे की तुलना में कम भुगतान किया जा रहा है, इस असमानता ने किसानों में भारी नाराजगी पैदा कर दी है।
फर्रुखाबाद में प्रदर्शन जारी
फर्रुखाबाद के मोहम्मदाबाद क्षेत्र में किसानों ने महापंचायत आयोजित कर अपना विरोध दर्ज कराया है, उनकी मांग है कि भूमि अधिग्रहण के लिए या तो पुराने सर्वेक्षण को आधार बनाया जाए, या फिर सभी किसानों को एक समान और न्यायसंगत मुआवजा सुनिश्चित किया जाए। किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता, तब तक वे संबंधित क्षेत्रों में काम शुरू नहीं होने देंगे।
परियोजना की वर्तमान स्थिति और यूपीडा का रुख
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) के अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के लिए 90 प्रतिशत से अधिक भूमि का अधिग्रहण शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कर लिया गया है और 600 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया जा चुका है, मुख्य एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसंबर 2025 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
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अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान विवाद मुख्य परियोजना से जुड़ी नई लिंक सड़कों के लिए किए जा रहे अधिग्रहण से संबंधित हैं, जहां जमीन की सर्किल दरें अलग-अलग हैं, जिला प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि उनकी शिकायतों की जांच की जा रही है और सरकार की नीति के अनुसार उचित मुआवजा सुनिश्चित किया जाएगा।
फिलहाल, मुआवजे को लेकर किसानों की नाराजगी ने परियोजना के कुछ हिस्सों में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे समय पर काम पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
















