
भारत सरकार टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों और FASTag की तकनीकी समस्याओं को खत्म करने के लिए एक नई AI-आधारित मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोलिंग प्रणाली लाने की तैयारी कर रही है, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 18 दिसंबर, 2025 को राज्यसभा में घोषणा की कि इस नई तकनीक को दिसंबर 2026 तक पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।
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FASTag रहेगा या हट जाएगा?
सरकार ने साफ किया है कि FASTag फिलहाल खत्म नहीं किया जा रहा. नया AI बेस्ड सिस्टम FASTag के साथ मिलकर काम करेगा. यानी यूजर को अलग से कोई नया टैग लगाने की जरूरत नहीं होगी, AI कैमरे नंबर प्लेट को पहचानेंगे और FASTag डेटाबेस से उसे जोड़कर टोल वसूली करेंगे, भविष्य में सिस्टम को और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाया जा सकता है, लेकिन शुरुआती दौर में FASTag ही इस पूरे ढांचे की रीढ़ रहेगा, इसके लिए जीपीएस भी यूज होगा।
क्यों बदला जा रहा टोल सिस्टम?
बीते कुछ सालों में FASTag ने टोल कलेक्शन को डिजिटल जरूर बना दिया, लेकिन जमीन पर दिक्कतें पूरी तरह खत्म नहीं हुईं, कई टोल प्लाजा पर आज भी जाम लगना, टैग स्कैन न होना, बैरियर खुलने में देरी और लेन बदलने की वजह से ट्रैफिक रुकने जैसी समस्याएं सामने आती रही है नितिन गडकरी ने संसद में कहा कि देश में नेशनल हाईवे नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है और ट्रैफिक भी तेज़ी से बढ़ा है, ऐसे में पुराने टोल मॉडल से न तो समय की बचत हो पा रही है और न ही फ्यूल की इसी वजह से सरकार अब बैरियर-फ्री और पूरी तरह डिजिटल टोलिंग सिस्टम की तरफ बढ़ रही है।
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1,500 करोड़ रुपये की बचत होगी
गडकरी ने सदस्यों से कहा, “2026 तक हम इस काम को 100 प्रतिशत पूरा कर लेंगे और एक बार यह कार्य पूरा हो जाने के बाद, 1,500 करोड़ रुपये की बचत होगी, हमारी आय में आगे 6,000 करोड़ रुपये की और वृद्धि होगी और टोल चोरी समाप्त हो जाएगी, कोई समस्या नहीं होगी और लोगों को टोल प्लाज़ा पर रुकना नहीं पड़ेगा.” उन्होंने कहा कि नई तकनीक निश्चित रुप से लोगों की मदद करेगी और यात्रा समय निश्चित रुप से कम होगा, मंत्री ने कहा कि सरकार हालांकि केवल राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए जिम्मेदार है और राज्य राजमार्गों या शहर की सड़कों के लिए नहीं, लेकिन कई बार सोशल मीडिया पर राज्य और शहर की सड़कों की समस्याओं को इस तरह पेश किया जाता है मानो वे राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुई हों
















