शिक्षा की दुनिया में नौकरी पाने के लिए B.Ed और D.El.Ed दोनों कोर्स बहुत चर्चित हैं। लेकिन अक्सर बच्चों और युवाओं के मन में सवाल रहता है कि आखिर कौन सा कोर्स तुरंत नौकरी दिलाता है और दोनों में असल फर्क क्या है? अगर आप भी शिक्षक बनने की सोच रहे हैं तो यह जानकारी आपकी मदद करेगी।

Table of Contents
D.El.Ed क्या है?
D.El.Ed यानी डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन, एक ऐसा कोर्स है जिसे 12वीं के बाद किया जा सकता है। यह विशेष रूप से प्राइमरी और एलिमेंट्री स्कूलों में पढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस कोर्स की अवधि आमतौर पर दो साल की होती है। इस में विद्यार्थियों को बच्चों की बुनियादी शिक्षा और सही तरीके से पढ़ाने की तकनीक सिखाई जाती है। चूंकि यह कोर्स जल्दी पूरा हो जाता है, इसलिए शुरुआती नौकरी पाने में भी मदद करता है।
B.Ed क्या होता है?
B.Ed या बैचलर ऑफ एजुकेशन एक स्नातक स्तर का कोर्स है जिसे पूरा करने के बाद छात्र मिडिल और हायर सेकेंडरी स्कूलों में टीचर बन सकता है। इस कोर्स की अवधि भी दो साल की होती है, लेकिन इसे करने के लिए ग्रेजुएशन डिग्री होना जरूरी है। इसमें अधिक विषयगत ज्ञान और शिक्षण विधियों पर ध्यान दिया जाता है। B.Ed करने के बाद नौकरी के विकल्प व्यापक होते हैं, लेकिन इसमें समय और मेहनत ज्यादा लगती है।
नौकरी पाने का मौका और वेतन
D.El.Ed करने वाले छात्र प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक के रूप में जल्दी नौकरी पा सकते हैं, खासकर सरकारी संस्थानों में। उनकी सैलरी आमतौर पर प्रारंभिक स्तर पर होती है, लेकिन स्थिर नौकरी के कारण यह बढ़ती रहती है। वहीं B.Ed धारक टीजीटी और पीजीटी पदों के लिए अधिक क्वालिफाइड होते हैं, इसलिए उनकी सैलरी और पद दोनों बेहतर होते हैं। सरकारी स्कूलों में नौकरी पाने के लिए CTET या अन्य टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट क्लियर करना आवश्यक है।
कौन सा कोर्स चुनें?
अगर आपकी प्राथमिकता जल्दी नौकरी पाना है और प्राइमरी शिक्षा में रुचि है तो D.El.Ed सही विकल्प है। वहीं अगर आप उच्च स्तर की पढ़ाई करना चाहते हैं और बेहतर पद तथा वेतन की उम्मीद रखते हैं तो B.Ed आपके लिए बेहतर रहेगा। दोनों कोर्सों के बाद उचित तैयारी और परीक्षा में सफलता से ही शिक्षा के क्षेत्र में बेहतरीन मौका मिलता है।
















