
बिहार के लोगों के लिए खुशखबरी है। लंबे इंतजार के बाद मुंगेर से भागलपुर के बीच बनने वाले मरीन ड्राइव प्रोजेक्ट को लेकर ठोस कदम उठाए जा चुके हैं। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) ने परियोजना से संबंधित लैंड एक्यूजिशन प्रपोजल (एलएपी) जिला प्रशासन को सौंप दिया है। अब जल्द ही जमीन अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी पर
बीएसआरडीसीएल के अधिकारियों के अनुसार अगले 15 दिनों में जिला प्रशासन को भूमि अधिग्रहण के लिए पत्र भेजा जाएगा। इसके बाद भू-अर्जन विभाग जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा। भूमि अधिग्रहण के दौरान जिला प्रशासन का रोल अहम रहेगा, क्योंकि आगे की कार्रवाई राजस्व अभिलेख, खाता-खेसरा और सीमांकन के आधार पर तय की जाएगी। अधिकारी बता रहे हैं कि सरकारी भूमि की उपलब्धता और निजी भूखंडों के अधिग्रहण की स्थिति इसी सर्वे के बाद स्पष्ट होगी।
सामाजिक प्रभाव आकलन की होगी प्रक्रिया
जमीन के अधिग्रहण से पहले प्रभावित परिवारों और किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा। इस प्रक्रिया को सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) कहा जाता है। रिपोर्ट तैयार होने के बाद सेक्शन-11 के तहत अधिसूचना जारी होगी, जिससे भूमि अधिग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इसमें प्रभावित लोगों को मुआवजा और पुनर्वास के लाभ देने की भी व्यवस्था होगी।
नक्शा मिलने के बाद हटाई गई बड़ी अड़चन
इस परियोजना के शुरुआती चरण में नक्शा न मिलने के कारण काम काफी समय से अटका हुआ था। लगभग आठ किलोमीटर इलाके का सर्वे नक्शा न होने से लैंड एक्यूजिशन प्रपोजल तैयार नहीं किया जा सका था। अब नक्शा उपलब्ध हो गया है, जिससे बीएसआरडीसीएल ने सभी जरूरी दस्तावेजों को तैयार कर लिया है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अगले सात दिनों में मुंगेर जिला प्रशासन को भी एलएपी की प्रति सौंप दी जाएगी।
एक साथ दोनों जिलों में शुरू होगा काम
मरीन ड्राइव का निर्माण मुंगेर और भागलपुर, दोनों जिलों में एक साथ शुरू करने की योजना है। विभाग का तर्क है कि जैसे-जैसे जमीन उपलब्ध होती जाएगी, निर्माण कार्य आगे बढ़ता रहेगा ताकि किसी एक हिस्से में अड़चन आने से पूरी परियोजना प्रभावित न हो। इस परियोजना को पूरा करने के लिए बीएसआरडीसीएल को वन विभाग से फॉरेस्ट क्लीयरेंस और पर्यावरण विभाग से एनवायरमेंट क्लीयरेंस लेना भी जरूरी होगा।
जमीन अधिग्रहण की प्रमुख प्रक्रियाएं
परियोजना के लिए जिला प्रशासन द्वारा जिन चरणों में कार्रवाई होगी, वे इस प्रकार हैं –
- राजस्व सर्वे और भूखंडों का चिह्नांकन
- सार्वजनिक आपत्तियों का निपटारा
- सामाजिक प्रभाव आकलन
- मुआवजा निर्धारण
- भू-अधिग्रहण और हस्तांतरण
निविदा और एजेंसी का चयन हो चुका है
मरीन ड्राइव परियोजना के लिए निविदा आमंत्रित कर ली गई थी और कार्य एजेंसी का चयन भी हो चुका है। अब केवल भूमि हस्तांतरण का इंतजार है, जिसके बाद फील्ड में मशीनरी और श्रमिकों की तैनाती शुरू हो जाएगी। फिलहाल सर्वे, वर्क-बाउंड्री और मार्ग निर्धारण से संबंधित प्रारंभिक कार्य लगभग पूरे कर लिए गए हैं।
पर्यावरणीय स्वीकृति की तैयारी
विभाग की ओर से वन विभाग को औपचारिक पत्र भेजा गया है, साथ ही ऑनलाइन पोर्टल पर तकनीकी आग्रह भी दर्ज कर दिया गया है। निर्माण शुरू करने से पहले पर्यावरणीय अनुमति के लिए तकनीकी रिपोर्ट और मूल्यांकन भी जल्द जमा किया जाएगा। जैसे ही ये स्वीकृतियां पूरी होंगी, निर्माण कार्य की राह पूरी तरह साफ हो जाएगी।
दो चरणों में बनेगा मरीन ड्राइव
मरीन ड्राइव का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा।
- पहला चरण: सफियाबाद से सुल्तानगंज तक, लंबाई 35 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹4450.17 करोड़
- दूसरा चरण: सुल्तानगंज से सबौर तक, लंबाई 40.80 किलोमीटर, अनुमानित लागत ₹3842.48 करोड़
दोनों चरणों के पूरा होने के बाद यह मार्ग मुंगेर और भागलपुर के बीच न केवल यातायात सुगम बनाएगा बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देगा।
















