
साल 2025 भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी के मोर्चे पर मिला-जुला साबित हुआ। एक ओर कॉमर्शियल ग्राहकों को राहत मिली, वहीं घरेलू उपभोक्ताओं की जेब थोड़ी भारी हुई। जहां 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कुल ₹238 की गिरावट दर्ज की गई, वहीं घरेलू सिलेंडर ₹50 महंगे हुए।
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कॉमर्शियल सिलेंडर के दामों में राहत
रेस्टोरेंट, कैफे, होटल और छोटे व्यवसायों के लिए इस्तेमाल होने वाले 19 किलो वाले कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम 2025 में लगातार सुधरे। जनवरी से दिसंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली में इसकी कीमतों में ₹238 की कमी दर्ज की गई। दिसंबर महीने में भी इसमें करीब ₹10 से ₹10.50 की और कटौती हुई।
वर्तमान में दिल्ली में कॉमर्शियल एलपीजी की कीमत ₹1,580.50 प्रति सिलेंडर, मुंबई में ₹1,531.50 और कोलकाता में ₹1,684.00 है। यह कटौती उन कारोबारियों के लिए राहत का संकेत है जो इन ईंधनों पर प्रतिदिन निर्भर रहते हैं। खासकर होटल और छोटे खाद्य उद्योगों के लिए यह राहत आर्थिक रूप से सहायक रही है।
घरेलू सिलेंडर थोड़े महंगे हुए
घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 2025 की सबसे बड़ी खबर अप्रैल में आई, जब 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹50 बढ़ा दी गई। तब से साल के अंत तक दरें स्थिर रहीं। दिसंबर 2025 तक दिल्ली में घरेलू गैस की कीमत ₹853.00 और मुंबई में ₹852.50 है।
हालांकि भार सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को राहत देने का फैसला बरकरार रखा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत लाभ लेने वाले परिवारों को ₹300 की सब्सिडी मार्च 2026 तक मिलती रहेगी। इसका सीधा लाभ करोड़ों गरीब महिलाओं को मिल रहा है, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में।
सरकार का फोकस
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सरकार का ध्यान आने वाले वर्षों में दो प्रमुख मुद्दों पर है सस्ते दाम (affordability) और निरंतर आपूर्ति (stability)। पेट्रोल और गैस के अंतरराष्ट्रीय दामों में गिरावट के संकेत के चलते उम्मीद की जा रही है कि अगले साल एलपीजी की कीमतों में या तो स्थिरता रहेगी या हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है।
इसका सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा, क्योंकि ईंधन की कीमतों में स्थिरता सीधे रसोई बजट और उत्पादन लागत दोनों को प्रभावित करती है।
2026 के लिए क्या अनुमान?
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए अपेक्षाकृत शांत वर्ष हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें फिलहाल नियंत्रित हैं और गैस की आपूर्ति सुचारू बनी हुई है। यदि कोई बड़ा भू-राजनीतिक संकट नहीं आता तो एलपीजी की कीमतों में गिरावट संभव है।
सरकार की नीतियों के अनुसार उज्ज्वला योजना में कुछ बदलाव भी देखे जा सकते हैं। संभावना है कि सब्सिडी के तहत मुफ्त या रियायती रिफिल की संख्या 12 से घटाकर 9 प्रति वर्ष कर दी जाए। इससे कुल वार्षिक सब्सिडी खर्च घटेगा, लेकिन लाभार्थियों को थोड़ा प्रभाव जरूर महसूस होगा।
राहत या चिंता: उपभोक्ता क्या सोचें?
जहां एक ओर कॉमर्शियल सिलेंडर की दरों में कमी से छोटे व्यवसायों को राहत मिली है, वहीं घरेलू सिलेंडर की बढ़ी कीमतें आम लोगों के बजट पर हल्का असर डाल रही हैं। हालांकि ₹300 की सब्सिडी के चलते उज्ज्वला योजना वाले लाभार्थियों को राहत बनी हुई है। महिलाओं के दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह योजना रसोई ईंधन के खर्च को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभा रही है, लेकिन भविष्य में रिफिल की संख्या को घटाने से कुछ परिवारों पर अतिरिक्त बोझ आ सकता है।
















