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सावधान! अगर क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत हो जाए, तो क्या परिवार को चुकाना होगा बिल? जानें RBI का सख्त नियम।

क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत पर बकाया कौन चुकाएगा? परिवार व्यक्तिगत तौर पर जिम्मेदार नहीं, लेकिन मृतक की संपत्ति से वसूली हो सकती है। उत्तराधिकारी को विरासत जितना ही देना पड़ेगा। कोई प्रॉपर्टी न हो तो कर्ज राइट-ऑफ। जॉइंट/गारंटर अलग नियम। तुरंत बैंक सूचित करें, इंश्योरेंस चेक करें।

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सावधान! अगर क्रेडिट कार्ड होल्डर की मौत हो जाए, तो क्या परिवार को चुकाना होगा बिल? जानें RBI का सख्त नियम।

आजकल क्रेडिट कार्ड हर किसी की जेब में होता है, लेकिन क्या हो अगर कार्ड होल्डर की अचानक मौत हो जाए और बकाया बाकी रह जाए? ये सवाल कई परिवारों के मन में खटकता है, पर चिंता मत करो, कानून साफ कहता है कि परिवार पर ये बोझ नहीं पड़ता। आइए, स्टेप बाय स्टेप समझते हैं कि ऐसी स्थिति में क्या होता है।

क्रेडिट कार्ड क्यों है अनसिक्योर्ड?

देखो भाई, क्रेडिट कार्ड कोई सिक्योर्ड लोन थोड़े है जहाँ घर-जमीन गिरवी रखनी पड़े। बैंक बस तुम्हारी सैलरी और CIBIL स्कोर देखकर कार्ड थमा देते हैं। RBI के नियमों के मुताबिक, ये पूरी तरह तुम्हारी पर्सनल जिम्मेदारी है। अगर होल्डर की मौत हो गई, तो परिवार को अपनी जेब से एक पैसा नहीं देना पड़ता। बस इतना ही, सिंपल।​

मौत के बाद बैंक क्या करता है?

पर कर्ज तो गायब थोड़े ना हो जाता! बैंक सबसे पहले मृतक की अपनी संपत्ति पर नजर रखता है। जैसे, बैंक अकाउंट में बैलेंस, FD, म्यूचुअल फंड्स, शेयर, प्रॉपर्टी या गोल्ड। कानूनी तरीके से वहीँ से बकाया वसूल लेते हैं। अगर संपत्ति बकाए से ज्यादा है, तो बाकी पैसा वारिसों को मिल जाता है। लेकिन अगर कुछ नहीं मिला, तो बैंक को NPA या बैड डेट लिखना पड़ता है।​

उत्तराधिकारियों पर क्या असर?

अब सोचो, अगर मृतक की प्रॉपर्टी वारिसों को मिली, तो क्या होगा? हाँ, बैंक उस हिस्से से वसूली कर सकता है जितना वारिस को मिला। मिसाल के तौर पर, 10 लाख की प्रॉपर्टी मिली और बकाया 8 लाख, तो पूरा चुकाना पड़ेगा। लेकिन अगर बकाया 12 लाख है, तो सिर्फ 10 लाख ही कटेगा, बाकी बैंक का नुकसान। वारिस अपनी निजी कमाई या संपत्ति से कुछ नहीं देंगे। ये फैमिली पर दया का नियम है।​

जॉइंट कार्ड या गारंटर का केस अलग

अगर कार्ड जॉइंट था, तो बचा हुआ होल्डर पूरा बकाया चुकाएगा। गारंटर ने साइन किया था, तो वो जिम्मेदार। लेकिन सिंगल होल्डर के केस में कोई टेंशन नहीं। सिक्योर्ड कार्ड (जैसे FD वाला) में तो FD से ही कट जाता है। हमेशा टर्म्स चेक करो कार्ड लेते वक्त।

परिवार को तुरंत क्या करना चाहिए?

मौत होते ही बैंक को खबर करो, डेथ सर्टिफिकेट जमा कर दो। कार्ड ब्लॉक हो जाएगा, ब्याज-जुर्माना रुक जाएगा। रिकवरी एजेंट घर आए तो डरो मत – पुलिस या RBI ओम्बड्समैन में शिकायत ठोक दो। वो तुम्हारी निजी संपत्ति नहीं छू सकते। ये आपका हक है।

इंश्योरेंस से राहत मिलेगी?

कई प्रीमियम कार्ड्स में क्रेडिट लाइफ इंश्योरेंस होता है। दुर्घटना या नेचुरल डेथ पर बीमा कंपनी बकाया कवर कर देती है। लिमिट पहले से फिक्स होती है, तो पेपर चेक करो। ये सुविधा हर कार्ड पर नहीं, लेकिन मिले तो गेम चेंजर है।

बचाव के टिप्स

क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करो लेकिन लिमिट में। फैमिली को अपनी फाइनेंशियल डिटेल्स बता दो, विल बनाओ। इससे टेंशन कम होगा। याद रखो, जिंदगी अनप्रेडिक्टेबल है, लेकिन स्मार्ट प्लानिंग से सब संभल जाता है।

Author
Divya

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