
नई दिल्ली: भारत में मोबाइल और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग की दुनिया में एक नई क्रांति की तैयारी हो रही है। सरकारी प्रसारक प्रसार भारती-Public Broadcaster Prasar Bharati ने डायरेक्ट-टू-मोबाइल (D2M-Direct to Mobile) तकनीक की टेस्टिंग की है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके माध्यम से लोग मोबाइल-Phones में लाइव टीवी-Live TV चैनल देख सकेंगे, वो भी बिना इंटरनेट-बिना Mobile Data के।
हालांकि इस परीक्षण में प्रमुख टेलिकॉम कंपनियों जैसे Jio, Airtel, Vodafone-Idea को शामिल नहीं किया गया, जिससे COAI-Cellular Operators Association of India ने अपनी चिंता जताई है।
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D2M तकनीक क्या है?
D2M तकनीक का मुख्य उद्देश्य मोबाइल डिवाइस पर लाइव टीवी-Live TV चैनल पहुंचाना है, बिना किसी इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क-Mobile Network के।
- इसका मतलब है कि ग्रामीण और दूर-दराज़ क्षेत्रों के लोग भी सूचना-Information और आपदा Alerts-Emergency Alerts बिना नेटवर्क बाधा के प्राप्त कर सकेंगे।
- इस प्रणाली में टेलिकॉम टावर्स-Telecom Towers का इस्तेमाल नहीं होगा, यानी Jio, Airtel, Vodafone जैसी कंपनियों के नेटवर्क पर दबाव नहीं पड़ेगा।
- तकनीक आपात स्थिति-Emergency Situation में बेहद उपयोगी हो सकती है, जैसे बाढ़ या भूकंप के दौरान तुरंत चेतावनी जारी करना।
प्रसार भारती का कहना है कि D2M तकनीक सभी मोबाइल फोन-Mobile Phones के लिए सुरक्षित होगी और इससे किसी भी तरह की नेटवर्क बाधा मोबाइल सिग्नल-Mobile Signal पर नहीं आएगी।
परीक्षण कहां और कैसे हुआ
D2M तकनीक की टेस्टिंग-Testing IIT कानपुर-IIT Kanpur के सहयोग से की गई। इसके लिए टेलिकॉम इंजीनियरिंग सेंटर-Telecom Engineering Centre और एराकॉन टेक्नोलॉजी-EraCon Technology जैसे पार्टनर्स को शामिल किया गया।
- परीक्षण के दौरान D2M तकनीक को सपोर्ट करने वाले मोबाइल फोन का इस्तेमाल हुआ।
- रिपोर्ट के अनुसार, मोबाइल फोन मोबाइल सिग्नल-Mobile Signal पर असर नहीं पड़ता और फोन अधिक गर्म नहीं हुए।
- परीक्षण की रिपोर्ट नवंबर 2025 में आई, जिसमें तकनीक की विश्वसनीयता को प्रमाणित किया गया।
IIT कानपुर ने यह भी सुनिश्चित किया कि लाइव टीवी चैनल की ब्रॉडकास्टिंग मोबाइल फोन में स्मूद-Streaming तरीके से हो और इसमें कोई तकनीकी खामी न हो।
COAI की आपत्ति
हालांकि, इस परीक्षण से COAI-Cellular Operators Association of India काफी नाराज़ है। उनका कहना है कि
- टेलिकॉम कंपनियों को शामिल न करना भविष्य में नेटवर्क इंटरफेरेंस-Network Interference जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
- तकनीक को लेकर जो परीक्षण हुए हैं, वे पूरी प्रक्रिया नहीं दर्शाते।
- रिपोर्ट के अनुसार किसी समस्या का उल्लेख नहीं है, लेकिन COAI का कहना है कि परीक्षण में टेलिकॉम ऑपरेटरों की भागीदारी-Participation जरूरी थी।
COAI का मानना है कि D2M तकनीक अगर बड़े पैमाने पर लागू की जाती है, तो मोबाइल नेटवर्क-Mobile Network और सेलुलर कनेक्टिविटी-Cellular Connectivity पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए सभी स्टेकहोल्डर्स-Stakeholders को शामिल करना आवश्यक है।
ग्रामीण भारत में संभावित लाभ
D2M तकनीक का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में देखने को मिलेगा।
- बिना इंटरनेट और मोबाइल डेटा के लाइव टीवी चैनल-Live TV Channels देखा जा सकेगा।
- आपात स्थिति या प्राकृतिक आपदा के दौरान इमरजेंसी अलर्ट-Emergency Alerts तुरंत लोगों तक पहुंचाए जा सकेंगे।
- ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल डिवाइड-Digital Divide को कम करने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक भारत के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर-Digital Infrastructure को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है।
भविष्य की राह
- प्रसार भारती और IIT कानपुर अगले चरण में D2M तकनीक को बड़े पैमाने पर लागू करने-Scale Up की संभावनाओं का अध्ययन कर रहे हैं।
- COAI और टेलिकॉम कंपनियों के साथ संवाद और समन्वय-Coordination की आवश्यकता होगी ताकि तकनीक के चलते किसी भी तरह की नेटवर्क समस्या-Network Issue न हो।
- यदि सफल रही, तो यह तकनीक मोबाइल TV-Mobile TV और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग-Digital Broadcasting के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकती है।
















