श्रमिक संगठनों ने हाल ही में सरकार से सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में कर्मचारियों के योगदान पर टैक्स राहत देने की और पुरानी पेंशन योजना (OPS) को पुनः लागू करने की जरुरी मांग की है। उन्होंने खास तौर पर ईपीएफओ पेंशन की न्यूनतम राशि बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह करने का आग्रह किया है। यह पूरा मामला वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बजट तैयारियों की बैठक में उठाया गया, जिसमें दस केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संघ ने अपनी पक्ष रखा।

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आयकर छूट और सामाजिक सुरक्षा को बेहतर बनाने की मांग
श्रमिक संगठनों का कहना है कि वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए आयकर छूट की सीमा बढ़ाने के साथ-साथ ईपीएफओ और ईएसआई की योगदान और पात्रता सीमाओं को भी बढ़ाया जाना चाहिए। वे ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा खत्म करने और पेंशन पर टैक्स न लगाने की बात भी कर रहे हैं। उनके अनुसार इससे कर्मचारियों को सीधे फायदा होगा और सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी।
असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा निधि
असंगठित एवं कृषि श्रमिकों के लिए एक केंद्रीय सामाजिक सुरक्षा कोष की स्थापना की मांग भी शामिल है, जिसमें उन्हें न्यूनतम 9,000 रुपये पेंशन, महंगाई भत्ता (डीए), एवं स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे लाभ दिए जाएं। यह कदम देश के गरीब व असहाय वर्ग की आर्थिक मजबूती के लिए अहम है।
टैक्स स्ट्रक्चर सुधार और संसाधन जुटाने के प्रस्ताव
संगठनों ने सुझाव दिया है कि सामान्य जनता पर खाद्य वस्तुओं और दवाओं पर जीएसटी बढ़ाने के बजाय, कंपनी टैक्स, संपत्ति टैक्स और उत्तराधिकार (इनहेरिटेंस) टैक्स को बढ़ाकर संसाधनों का प्रबंध किया जाए। वे अमीरों पर 1% उत्तराधिकार टैक्स लगाने की भी वकालत कर रहे हैं, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्रों के लिए अधिक फंड मिल सकेगा।
सरकारी रोजगार और पेंशन सुधार
श्रमिक संगठनों ने सरकारी नौकरियों में तुरंत रिक्त पद भरने का आग्रह किया है और मांग की है कि निश्चित अवधि की नौकरियों को खत्म कर स्थायी रोजगार व्यवस्था लागू की जाए। इसके अलावा, नई पेंशन योजना (NPS) को समाप्त कर पुरानी पेंशन योजना को वापस लाने की भी जोरदार मांग की गई है।
ईपीएस-95 में पेंशन बढ़ोतरी और वेतन आयोग की मांगें
संगठनों ने ईपीएस-95 के तहत न्यूनतम पेंशन को 1,000 से बढ़ाकर 9,000 रुपये प्रति माह करने और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ने की मांग की है। साथ ही, आठवें वेतन आयोग के गठन की जल्दी करने और उसमें पेंशनभोगियों को शामिल करने पर भी बल दिया गया है। न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये प्रति माह (मुद्रास्फीति वृद्धि के साथ) तय करने की भी मांग प्रमुखता से उठी है।
निजीकरण और मौद्रीकरण के विरोध में स्वर
अंत में, श्रमिक संगठनों ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण और राष्ट्रीय मौद्रीकरण पाइपलाइन को रोकने और खत्म करने की मांग की है, जिससे वे सार्वजनिक क्षेत्रों की स्थिरता और रोजगार सुरक्षा पर अपनी चिंता व्यक्त करते हैं।
इस प्रकार, श्रमिक संगठनों ने आगामी बजट 2026 के लिए मजबूत एवं व्यापक मांगों की सूची प्रस्तुत की है, जिसमें सामाजिक सुरक्षा, रोजगार सुरक्षा, वेतन सुधार और टैक्स प्रणाली के संवेदनशील सुधार शामिल हैं, जो देश के श्रमिक वर्ग की उन्नति और हित में आवश्यक माने जा रहे हैं।
















