
कर्मचारी पेंशन योजना (EPS-95) से जुड़े करोड़ों पेंशनर्स लंबे समय से उम्मीद लगाए बैठे थे कि उनकी न्यूनतम पेंशन ₹1,000 से बढ़ाई जाएगी। कई यूनियनों ने इसे ₹7,500 तक बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने इस पर जो जवाब दिया है, उससे पेंशनर्स को एक बार फिर झटका लगा है।
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सरकार का साफ बयान
लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि फिलहाल ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन को बढ़ाने की कोई योजना सरकार के पास नहीं है। उनका कहना है कि EPS-95 फंड “एक्चुरियल तनाव (Actuarial Deficit)” से जूझ रहा है — यानी इसमें इतनी वित्तीय कमी है कि मौजूदा देनदारियों को पूरा करना ही मुश्किल हो रहा है।
EPS-95 स्कीम कैसे होती है फंड?
EPS-95 एक Defined Contribution – Defined Benefit स्कीम है। इसमें
- नियोक्ता (Employer) कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 8.33% योगदान देता है।
- केंद्र सरकार 1.16% का योगदान देती है, जो ₹15,000 मासिक वेतन लिमिट तक लागू होता है।
इसी योगदान से फंड तैयार होता है, जिससे सभी मौजूदा और रिटायर पेंशनर्स को भुगतान किया जाता है। लेकिन जैसे-जैसे पेंशनर्स की संख्या और जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) बढ़ी है, फंड पर भार भी कई गुना बढ़ गया है।
EPS फंड में भारी घाटा
सरकार ने बताया कि 31 मार्च 2019 तक की वैल्यूएशन रिपोर्ट में फंड में गंभीर वित्तीय घाटा पाया गया। इसका सीधा मतलब है कि EPS-95 फंड भविष्य की देनदारियों और मौजूदा पेमेंट्स दोनों को संभालने में कठिनाई का सामना कर रहा है। इसीलिए सरकार को फिलहाल किसी प्रकार की पेंशन वृद्धि उचित नहीं लग रही।
फिलहाल सरकार ₹1,000 की न्यूनतम पेंशन को अपने बजट सपोर्ट के जरिए जारी रखे हुए है और 1.16% सेंट्रल योगदान भी देती है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई
सरकार ने बताया कि 4 नवंबर 2022 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद EPFO ने “हाईयर पेंशन ऑप्शन” प्रक्रिया को निर्धारित समय में लागू किया।
- अब तक 17.49 लाख आवेदन जमा किए जा चुके हैं।
- इनमें से अधिकांश यानी 99% आवेदन EPFO द्वारा निपटा दिए गए हैं।
- करीब 1.24 लाख पेंशन ऑर्डर (PPO) जारी हो चुके हैं, जबकि कुछ अंतिम चरण में हैं।
यह दिखाता है कि सरकार और EPFO कोर्ट के निर्देशों को लागू करने में तेजी से काम कर रहे हैं।
क्या प्रॉ-राटा पेंशन हटेगी?
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि “प्रॉ-राटा पेंशन सिस्टम” EPS के नियमों के अनुसार बिल्कुल वैध है और इसे हटाने की कोई योजना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे नियमों के अनुरूप माना है। इसका मकसद विभिन्न आय वर्ग के पेंशनर्स के बीच समानता बनाए रखना है।
पेंशनर्स की बड़ी चिंता
दूसरी ओर, पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि ₹1,000 की पेंशन में आज गुजारा मुश्किल है। लगातार बढ़ती महंगाई और दवाइयों, बिजली, किराए जैसे खर्चों को देखते हुए पेंशन बढ़ाना अब “Need of the Hour” बन गया है। वे यह भी मांग कर रहे हैं कि EPS पेंशन में महंगाई भत्ता (DA) जोड़ा जाए, ताकि पेंशन राशि रियल-टाइम में महंगाई के साथ संतुलित रह सके।
सरकार का रुख क्या है?
सरकार ने दोहराया है कि वह पेंशनर्स को अधिकतम लाभ देने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन किसी भी निर्णय से पहले फंड की स्थिति, उसकी “दीर्घकालिक स्थिरता” और भविष्य की देनदारियों का ध्यान रखा जाएगा।
फिलहाल राहत नहीं, इंतजार जारी
साफ शब्दों में कहें तो EPS-95 के तहत फिलहाल न्यूनतम पेंशन बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सरकार चाहती है कि पहले फंड की वित्तीय स्थिति को स्थिर किया जाए। इसका मतलब है कि जो पेंशनर्स ₹1,000 की मासिक पेंशन पा रहे हैं, उन्हें अभी कुछ और समय तक इंतजार करना होगा।
















